बनती हुई स्मृतियों का चित्र
Monday, June 22, 2009
तंत्र संसार में स्वतः-गति को निर्देशित करने के लिये और अपने दैनंदिन अस्तित्व तथा पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिये हमें नित सीखने और नवीन स्मृतियों को धारण करने की योग्यता का होना आवश्यक है । स्मृति का यह व्यापार हमें भूत, वर्तमान और वस्तुतः भविष्य से भी संयुक्त करने का उद्यम है । वैज्ञानिक इस स्मृति का अवलोकन करता रहा और ढूँढ़ता रहा इसके रहस्य । फिलहाल हम आपको दिखा रहे हैं इसी रहस्यमय स्मृति-निर्माण का चित्र । मॉंण्ट्रियल न्यूरोलॉजिकल इन्स्टीट्यूट एण्ड हॉस्पिटल, मैकगिल विश्वविद्यालय (Montreal Neurological Institute and Hospital - The Neuro, McGill University) एवं कैलीफोर्नियाविश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस (University of California, Los Angeles) के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन के दौरान संभवतः पहली बार उस क्रियाविधि (विशेषतः प्रोटीन रुपांतर - Protein Translation) का चित्र खींचा है, जो दीर्घावधि स्मृति-निर्माण के लिये उत्तरदायी होती है ।यह शोध हमें प्रथम दृश्य-साक्ष्य उपलब्ध कराता है कि जब नयी स्मृतियाँ बनती हैं तब नये प्रोटीन सिनाप्स (Synaps- तंत्र -कोशिकाओं का युग्मन-स्थल) पर निर्मित होते हैं जो इस सूत्र-युग्मन की सामर्थ्य को और भी बढ़ा देने और स्मृति को और भी प्रबल करने में सहायक होते हैं । प्रतिष्ठित "साइंस" (Science) पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन किस प्रकार स्मृति-चिह्न निर्मित होते हैं ? यह समझने के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण सिद्ध होगा, और इस निर्मिति की प्रक्रिया को उन्हीं निर्मिति के क्षणों में अवलोकित करना हमें विस्तार से यह समझने के योग्य बना सकेगा कि किस प्रकार स्मृति मस्तिष्क में अन्ततः स्थायी हो जाती है?
जब हम इस बात पर विचार करते हैं कि वस्तुतः मस्तिष्क में क्या घटित होता होगा ? हमें मस्तिष्क के दो गुण अपने खयाल में रख लेने आवश्यक होते हैं - पहला, चूँकि हमें अधिकाधिक सूचनायें लम्बे समय तक मस्तिष्क में बनाये रखनी होती हैं, यह आवश्यक है कि वहाँ स्थिरता हो; दूसरा, ग्रहण करने और सीखने की सुविधा के लिये एक अत्यधिक नम्य व्यवस्था हो ।
इन कारणों से इस अध्ययन को सिनाप्सेज (Synapses- चेतोपागम) पर केन्द्रित कर दिया गया जो मूलतः मस्तिष्क में आदान-प्रदान और संचयन का मुख्य केन्द्र है । यह एक स्थिर और वृहद तंत्र-संयुग्मन (connection of network) का कार्य करता है, जिसकी परिवर्तन और ग्रहण करने की योग्यता -- जिसे हम सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी (Synaptic Plasticity ) कहते हैं -- अधिगम और स्मृति का मूल आधार बन सकती है ।
स्मृति निर्माण की प्रक्रिया के चित्र कैसे खींचे गये? इसे स्पष्ट करते हुए ’द न्यूरो’(The Neuro) के वैज्ञानिक एवं अध्ययन के सह-अन्वेषक डॉ० वेन सोसिन (Dr. Wayne Sossin) स्पष्ट करते हैं कि ट्रांसलेशनल रिपोर्टर (Translational Reporter) के उपयोग से - चूँकि एक प्रतिदीप्त प्रोटीन (Fluorescent Protein) आसानी से जाना और पहचाना जा सकता है - हमने स्मृति-निर्माण के दौरान बढ़ते हुए प्रोटीन रुपांतर या प्रोटीन संश्लेषण को सीधे तौर पर दृश्यांकित किया । (चित्र देखें )
इस अध्ययन से स्मृति-निर्माण के सम्बंध में कई नवीन सूचनायें प्राप्त हुई हैं, और यह आशा की जानी चाहिये कि दीर्घावधि स्मृति धारण करने की योग्यता को विकसित करने और स्मृति-असमर्थता संबंधी व्याधियों के निदान के लिये यह शोध एक नयी अन्तर्दृष्टि प्रदान करेगा ।
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'तस्लीम' में पढें - 'बेटी गयी, मकान गया, अब जान की है बारी?'
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कमाल का अध्ययन । जानकारी का शुक्रिया ।
ReplyDeleteबहुत रोचक और सुगठित वैज्ञानिक जानकारी ! स्मृति के भौतिक अस्तित्व को जाँचना परखना सचमुच विस्मयकारी है !
ReplyDeleteबहुत ही अच्छी जानकारी ,बधाई हिमांशु जी .
ReplyDeleteबहुत सुंदर जानकारी .. शुक्रिया।
ReplyDeleteअच्छी जानकारी दी, आभार!
ReplyDeleteKafi mahatwapurn hai yeh shodh. Jaankari ka aabhar.
ReplyDeleteHimanshu ji, SBAI Pariwar men aapka haardik swagat hai.
ReplyDeleteSmriti se sambandhit yah aalekh padhkar kai prakar ki jaankariya mileen. Is hetu aapka aabhaar.
Aasha hi aage bhi aap aise hi rochak aur gyanvardhak samagri se hamen laabhaanvit karte rahenge.
aapke alekh ko per ke lagta hai ki apne iski liye kafi gahan adhyan kiya hoga...
ReplyDeletebahut achhi jankari di apne...
मुझे तो ऐसा लगता है कि इस तरह की जानकारी ज्यादा से ज्यादा हो ताकि साइंस मे क्या कुछ चल रहा है इस बात की जानकारी ज्यादा से ज्यादा आम आदमी तक पहुच सके ....synaptic apace सेसम्बन्धित जो भी जानकारी प्रस्तुत की वह रोचक है .........सुन्दर
ReplyDeleteis reochak jaankari ke liye aapaka shukria.....
ReplyDeleteachche jankaari mili.dhnywaad.
ReplyDeleteबहुत ही रोचक जानकारी मिली आपके इस लेख के माध्यम से शुक्रिया
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