तो भारत जैसे देश है ग्लोबल वार्मिंग के दोषी !

आजकल जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसे विषयों पर चर्चा काफी फैशनेबल हो चुकी है। कई राष्ट्रीय - अन्तराष्ट्रीय शोध मानवजनित क्रियाओं को इ...


आजकल जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग जैसे विषयों पर चर्चा काफी फैशनेबल हो चुकी है। कई राष्ट्रीय - अन्तराष्ट्रीय शोध मानवजनित क्रियाओं को इन समस्याओं का कारण सिद्ध करते हुए असीमित चर्चा और पुरस्कार संकलित कर रहे हैं. इस क्रम में धरती के स्वतः शीत और गर्म होने के चक्र, सौर चक्र आदि प्राकृतिक कारणों को सुनियोजित तरीके से नजरअंदाज करने के प्रयास भी किये जा रहे हैं. वैज्ञानिक बिरादरी भी इन्ही दावों की पुनरावृत्ति के लिए मजबूर है, क्योंकि प्रोजेक्ट और फंड ऐसे ही विषयों पर उपलब्ध हैं; (पारंपरिक विज्ञान जैसे घाघ-भड्डरी की कहावतों पर शोध के प्रोजेक्ट के आवेदन तो हास्यास्पद ही माने जायेंगे !)

मानवजनित क्रियाएं ग्लोबल वार्मिंग के लिए पूर्णतः दोषी नहीं ऐसा भी नहीं है, मगर सिर्फ यही एक कारण है ऐसा भी नहीं है. ये शोध विकसित देशों की नीतियों का अनुकरण करते हुए एक तीर से कई शिकार करने की प्रवृत्ति भी दर्शाते हैं.

इस कुप्रचार की आड़ में विकासशील देशों की प्रगति को लगाम लगाने के प्रयास किये जा रहे हैं। जलवायु नीतियों तथा विभिन्न व्यापारिक कानूनों की आड़ में विकासशील देशों के औद्योगीकरण को प्रभावित करने के प्रयास किये जा रहे हैं.

वैज्ञानिक अध्ययन स्पष्ट करते हैं की 1751 से ही कुल कार्बन उत्सर्जन में विकासशील देशों का योगदान 20 % ही है. United Nations Environment Programme (UNEP) के 2002 के आंकडों से भी स्पष्ट होता है कि CO2 के उत्सर्जन में तेजी से विकास कर रहे चीन, ब्राजील और भारत जैसे देशों का योगदान वैश्विक औसत से कहीं कम है. (रेड्डी व असेक्जा; करेंट साइंस, वोल. 97, नं. 1, 10 जुलाई, 2009, पेज 50-62).

इस तथ्य का उल्लेख करना भी प्रासंगिक होगा कि तीसरी दुनिया के अधिकांश देश इस होड़ में पिछले कुछ दशकों से ही शामिल हुए हैं; किन्तु विकसित देशों का योगदान तो सैकडों वर्षों का है।

गौरतलब और दुखद है कि भारत जैसे विकासशील देश भी इस अन्तराष्ट्रीय बौद्धिक षड़यंत्र का शिकार बनते हुए छोटी मछलियों पर ही दबाव डालने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं। कृषि पर आधारित घुमंतू जनजातियों द्वारा वनों का तात्कालिक व आंशिक दहन, गावों के चूल्हे, गोबर तथा धान के खेत से कार्बन के घातक स्तर पर उत्सर्जन के दावे हास्यास्पद ही प्रतीत होते हैं. मगर क्या किया जाये कि विज्ञान जगत का ही एक वर्ग ऐसे ही दावों की पुष्टि में शपथपूर्वक जुटा प्रतीत हो रहा है.

ग्लोबल वार्मिंग और इसके संभावित दुष्परिणाम वाकई वैश्विक समस्या हैं, और इसका हल इसकी जिम्मेवारी अपने से कमजोरों पर डालने में नहीं; बल्कि सार्थक और इमानदार प्रयास से ही संभव है।
तस्वीर - साभार गूगल, आभार- करेंट साइंस
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COMMENTS

BLOGGER: 24
  1. बिल्कुल सही समय पर सही बात कही गयी है, वनों को कहीं-कहीं जलाने, गोबर के कन्डे आदि जलाने, चूल्हे आदि से ग्लोबल वार्मिन्ग नहीं होती; वस्तुतः विकसित देश अपनी लक्ज़री-ए.सी, कारें, ्कोल्ड्स्टोरेज़, फ़्रिज़,आदि से तो मुक्ति पाना नहीं चाहते जिनके उत्सर्जन सारे प्रदूषण की जड हैं अपितु इन उत्पादों को वे विकाश्सील देशों को बेच कर स्वयं का धन्धा भी ज़ारी रखना चाहते हैं तथा अप्नी गलतियों का ठीकरा भी उन्हीं के सिर थोपना चाहते हैं--दोनों हाथों में लड्डू--। पर यह तो हमें ही सोचना चाहिये।

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  2. "ग्लोबल वार्मिंग और इसके संभावित दुष्परिणाम वाकई वैश्विक समस्या हैं, और इसका हल इसकी जिम्मेवारी अपने से कमजोरों पर डालने में नहीं; बल्कि सार्थक और इमानदार प्रयास से ही संभव है।"

    इस जागरण पोस्ट के लिए,
    आपका आभार!

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  3. दिक्‍कत है कि जो पर्यावरण के आरोपित हैं, वही जज बन बैठे हैं। ग्‍लोब से लेकर गांव तक - हर जगह यही बात देखने को मिलती है। आपने अच्‍छा लिखा है।

    देसी एडीटर
    खेती-बाड़ी

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  4. विज्ञान हमेशा से सुविधाभोगियों के लिए और सुविधा तथा कमजोरों के लिए और कमजोरियां लेकर आया है .. यह कौन सी नई बात है !!

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  5. बात आप ने सही कही, लेकिन जब हमारे नेता ही भीख का कटोरा ले कर इन देशो के सामने गिडगिडाते है, ओर दुम हिलाते है, तो दुसरे तो हमे दबायेगे ही, क्या हमारे देश मै प्रतिभाओ की कमी है ?? जब तक हम अपनी इज्जत खुद नही करेगे तब तक हर टुचा देश भी हमे आंखे ही दिखायेगा.

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  6. अभिषेक जी, आपका कहना पूरी तरह सही है, सबसे बडी गल्ती अमेरिका करता है और सबसे ज्यादा धौंस भी वही दिखाता है।

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  7. बड़े देशों की बड़ी बातें! उनकी बराबरी करने पर विकासशील देशों को भेड़िए और मेमने की कहानी तो दोहरायी ही जाएगी।
    इंदिरागांधी ने संयुक्तराष्ट्र संघ के महा-अधिवेशन में रईस देशों को विकसशील देशों को टोकने पर आड़े हाथों लिया था- पहले स्वयं सुधरो फिर ग़रीब को समझाना। विकसित देश ऐशो-आराम के लिए गर्मी फैला रहे हैं जबकि दूसरे पेट की खातिर कुछ उजाड़ रहे हैं।

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  8. चीन को धौसायें तो जाने . भारत तो गरीब की बीबी है

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  9. At least four million Americans under age 65 are exposed to high doses of radiation each year from medical imaging tests, according to a new study in The New England Journal of Medicine.

    About 400,000 of those patients receive very high doses, more than the maximum annual exposure allowed for nuclear power plant employees or anyone else who works with radioactive material.

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  10. बिलकुल सही विश्लेषण

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  11. saaree charcha bahut achhi lagee bas yahi kahoongi aabhaar

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  12. चर्चा अच्छी है। मगर आम आदमी इस में कैसे contribute कर सकता है, मेरा मतलब पर्यावरण को बचाने में
    अब मुझे रोज़ आफिस जाना होता है, उसके लिये मैं अपनी मोटरसाइकिल इस्तेमाल करता हूँ
    तो क्या मैं बस का इस्तेमाल करना शुरू करूँ, बहुत मुश्किल होती है, महज़ सोचने भर से ही।

    आप अगर अपनी किसी पोस्ट में किसी दूसरी पोस्ट का लिंक दें तो इस तरह से दीजिये

    anchor tag me ye add kar deejiye
    target="_new"

    इस से क्लिक करने पर नई window में खुलेगा।
    वरना existing page में ही खुल जाता है

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  13. पर्यावरण संबन्धी चिंताओं के लिए विकासशील देशों को दोषी ठहराना विकसित देशों की नीति में शामिल है.

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  14. bilkul sahee par fir bhee tejee se katate wano kee tarf sarkar ka hee nahi aam adami ka bhee dhyan jana chahiye, wano ka bachane ke liye rashtreey star par muheem chedana jarooree hai .Aisee naee takneek ka shodh bee awasyak hai jo chlorofloro carbon ke utsarjan ko kum se kum kare.

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  15. baat to khari-khari hai saahebaan....

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  16. बेहद ही रोचक् एवं जानकारियों से भरपूर लेख. लेकिन् एक् सवाल् मुझे अभी भी तंग् करता है. वह यह कि ग्लोबल् वर्मिंग् के पीछे कितनी सच्चाई है. उमदा लेखन्. बधाई.
    स्वप्निल् भारतीय
    कल्किआन् हिन्दी

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  17. PAISE AUR TAKAT KE BAL PAR KUCH BADE DESH AAJ AISI BHRAANTIYAN FAILA RAHE HAIN ..... UNKO APNE GIREBAAN MEIN DEKHNA CHAAHIYE ....

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  18. प्रासंगिक विषय पर महत्वपूर्ण आलेख । आभार ।

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  19. आप की बात सही है..अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

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  20. accha likha hai paryeh batayen ki march/april me jab tapman 40-42 ho,2-2 saal barish nahi ho,december & jan. me jab 10-10 din kohra na hate,nadiyan sukh jaye, pani pine ko na mile, milk ki baat hi kya. tab aap kya kahate hai? global warming bakwas hai? sach kaho,apki soch simit hai.agar koi padosi adhik gandgi falata hai to hum ko bhi usko adhar mankar gandgi nahi falani . apna sudhar karna hi hoga.


    -----sanjay sharma narnaul

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  21. accha likha hai paryeh batayen ki march/april me jab tapman 40-42 ho,2-2 saal barish nahi ho,december & jan. me jab 10-10 din kohra na hate,nadiyan sukh jaye, pani pine ko na mile, milk ki baat hi kya. tab aap kya kahate hai? global warming bakwas hai? sach kaho,apki soch simit hai.agar koi padosi adhik gandgi falata hai to hum ko bhi usko adhar mankar gandgi nahi falani . apna sudhar karna hi hoga.


    -----sanjay sharma narnaul

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  22. For the help please use http://www.google.com

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- दर्शन लाल बावेजा,1,- बी एस पाबला,1,-Dr. Prashant Arya,2,-अंकित,4,-अंकुर गुप्ता,7,-अभिषेक ओझा,2,-अल्पना वर्मा,22,-आशीष श्रीवास्‍तव,2,-इन्द्रनील भट्टाचार्जी,3,-काव्या शुक्ला,2,-जाकिर अली ‘रजनीश’,56,-जी.के. अवधिया,6,-जीशान हैदर जैदी,45,-डा प्रवीण चोपड़ा,4,-डा0 अरविंद मिश्र,26,-डा0 श्‍याम गुप्‍ता,5,-डॉ. गुरू दयाल प्रदीप,8,-डॉ0 दिनेश मिश्र,5,-दर्शन बवेजा,1,-दर्शन लाल बवेजा,7,-दर्शन लाल बावेजा,2,-दिनेशराय द्विवेदी,1,-पवन मिश्रा,1,-पूनम मिश्रा,7,-बालसुब्रमण्यम,2,-योगेन्द्र पाल,6,-योगेश,1,-रंजना [रंजू भाटिया],22,-रेखा श्रीवास्‍तव,1,-लवली कुमारी,3,-विनय प्रजापति,2,-वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई),81,-शिरीष खरे,2,-शैलेश भारतवासी,1,-संदीप,2,-सलीम ख़ान,13,-हिमांशु पाण्डेय,3,.संस्‍था के उद्देश्‍य,1,।NASA,1,(गंगा दशहरा),1,100 billion planets,1,2011 एम डी,1,22 जुलाई,1,22/7,1,3/14,1,3D FANTASY GAME SPARX,1,3D News Paper,2,5 जून,1,Acid rain,1,Adhik maas,1,Adolescent,1,Aids Bumb,1,aids killing cream,1,Albert von Szent-Györgyi de Nagyrápolt,1,Alfred Nobel,1,aliens,1,All india raduio,1,altruism,1,AM,18,Aml Versha,1,andhvishwas,5,animal behaviour,1,animals,1,Antarctic Bottom Water,1,Antarctica,9,anti aids cream,1,Antibiotic resistance,1,arunachal pradesh,1,astrological challenge,1,astrology,1,Astrology and Blind Faith,1,astrology and science,1,astrology challenge,1,astronomy,4,Aubrey Holes,1,Award,4,AWI,1,Ayush Kumar Mittal,2,bad effects of mobile,1,beat Cancer,1,Beauty in Mathematics,1,Benefit of Mother Milk,1,benifit of yoga,1,Bhaddari,1,Bhoot Pret,3,big bang theory,1,Binge Drinking,1,Bio Cremation,1,bionic eye Veerubhai,1,Blind Faith,4,Blind Faith and Learned person,1,bloggers achievements,1,Blood donation,1,bloom box energy generator,1,Bobs Award,1,Breath of mud,1,briny water,1,Bullock Power,1,Business Continuity,1,C Programming Language,1,calendar,1,Camel reproduction centre,1,Carbon Sink,1,Cause of Acne,1,Change Lifestyle,1,childhood and TV,1,chromosome,1,Cognitive Scinece,1,comets,1,Computer,2,darshan baweja,1,Deep Ocean Currents,1,Depression Treatment,1,desert process,1,Dineshrai Dwivedi,1,DISQUS,1,DNA,3,DNA Fingerprinting,1,Dr Shivedra Shukla,1,Dr. Abdul Kalam,1,Dr. K. N. Pandey,1,Dr. shyam gupta,1,Dr.G.D.Pradeep,9,Drug resistance,1,earth,28,Earthquake,5,Einstein,1,energy,1,Equinox,1,eve donation,1,Experiments,1,Facebook Causes Eating Disorders,1,faith healing and science,1,fastest computer,1,fibonacci,1,Film colourization Technique,1,Food Poisoning,1,formers societe,1,gauraiya,1,Genetics Laboratory,1,Ghagh,1,gigsflops,1,God And Science,1,golden number,2,golden ratio,2,guest article,9,guinea pig,1,Have eggs to stay alert at work,1,Health,71,Health and Food,14,Health and Fruits,1,Heart Attack,1,Heel Stone,1,Hindi Children's Science Fiction,1,HIV Aids,1,Human Induced Seismicity,1,Hydrogen Power,1,hyzine,1,hyzinomania,1,identification technology,2,IIT,2,Illusion,2,immortality,2,indian astronomy,1,influenza A (H1N1) virus,1,Innovative Physics,1,ins arihant,1,Instant Hip Hain Relief,1,International Conference,1,International Year of Biodiversity,1,invention,5,inventions,30,ISC,2,Izhar Asar,1,Jafar Al Sadiq,1,Jansatta,1,japan tsunami nature culture,1,Kshaya 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Science Bloggers' Association: तो भारत जैसे देश है ग्लोबल वार्मिंग के दोषी !
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