जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटिविटी: ब्रह्माण्‍ड के रहस्‍यों की अद्भुत व्‍याख्‍या।

अल्‍बर्ट आइन्स्टीन (Albert Einstein) की जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी की आसान व्याख्या।

अल्‍बर्ट आइन्स्टीन (Albert Einstein) की जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी (General Theory of Relativity) विज्ञान के चमत्कारिक सिद्धांतों में से एक है। और चीजों को देखने का हमारा नज़रिया पूरी तरह बदल देती है। इस थ्योरी को समझना हालांकि अत्यन्त मुश्किल है, फिर भी इस लेख के द्वारा कुछ समझने की कोशिश करते हैं।

General Theory of Relativity
लगभग चार सौ साल पहले आइज़क न्‍यूटन Isaac Newton ने गिरते हुए सेब को देखकर एक महत्वपूर्ण खोज की थी जिसका नाम है गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त (Theory of Gravitational Force)। इस सिद्धान्त के अनुसार ब्रह्माण्ड में पदार्थिक पिण्ड एक दूसरे को अत्यन्त हल्के बल से खींचते हैं। इस बल को नाम दिया गया गुरुत्वाकर्षण बल। इसी बल के कारण हम धरती पर अपने कदम जमा पाते हैं। और यही बल ज़मीन को सूर्य के चारों ओर घुमाने के लिये लिये जिम्मेदार होता है। ब्रह्माण्ड में मौजूद हर पिण्ड गुरुत्वीय बलों के अधीन होकर गति कर रहा है। बाद में हुई कुछ और खोजों से मालूम हुआ है कि रौशनी भी गुरुत्वीय बल के कारण अपने पथ से भटक जाती है। और कभी कभी तो इतनी भटकती है कि उसकी दिशा घूमकर वही हो जाती है जिस दिशा से वह चली थी। इन तथ्यों की रौशनी में जब आइंस्टीन ने ब्रह्माण्ड का अध्ययन किया तो उसकी एक बिल्कुल नयी शक्ल निकलकर सामने आयी।

कल्पना कीजिए एक ऐसे बिन्दु की जिसके आसपास कुछ नहीं है। यहां तक कि उसके आसपास जगह भी नहीं है। ही उस बिन्दु पर बाहर से कोई बल आकर्षण या प्रतिकर्षण का लग रहा है। फिर उस बिन्दु में विस्फोट होता है और वह कई भागों में बंट जाता है। निश्चित ही ये भाग एक दूसरे से दूर जाने लगेंगे। और इसके लिये ये जगह को भी खुद से पैदा करेंगे। जो किसी ऐसे गोले के आकार में होनी चाहिए जो गुब्बारे की तरह लगातार फैल रहा है। और इसके अन्दर मौजूद सभी भाग विस्फोट हुए बिन्दु से बाहर की ओर सीढ़ी रेखा में चलते जायेंगे। किन्तु अगर ये भाग एक दूसरे को परस्पर किसी कमजोर बल द्वारा आकर्षित करें? तो फिर इनके एक दूसरे से दूर जाने की दिशा इनके आकर्षण बल पर भी निर्भर करने लगेगी। फिर इनकी गति सीढ़ी रेखा में नहीं रह जायेगी। अगर इन बिन्दुओं के समूह को आकाश माना जाये तो यह आकाश सीधा  होकर वक्र (Kerve) होगा  

हमारा ब्रह्मांड (Universe) भी कुछ इसी तरह का है जिसमें तारे मंदाकिनियां और दूसरे आकाशीय पिंड बिन्दुओं के रूप में मौजूद हैं। एक बिन्दुवत अत्यन्त गर्म सघन पिण्ड के विस्फोट द्वारा यह यह असंख्य बिन्दुओं में विभाजित हुआ जो आज के सितारे, ग्रह उपग्रह हैं। ये सब एक दूसरे को अपने अपने गुरुत्वीय बलों से आकर्षित कर रहे हैं। जो स्पेस में कहीं पर कम है तो कहीं अत्यन्त अधिक। आइंन्स्टीन का सिद्धान्त गुरुत्वीय बलों की उत्पत्ति की भी व्याख्या करता है। 
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अब अपनी कल्पना को और आगे बढ़ाते हुए मान लीजिए कि विस्फोट के बाद पैदा हुए असंख्य बिन्दुओं में से एक पर कोई व्यक्ति (व्‍bserver) मौजूद है। अब वह दूसरे बिन्दुओं को जब गति करते हुए देखता है तो उसे उन बिन्दुओं की गति का पथ जो भी दिखाई देगा वह निर्भर करेगा उन सभी बिन्दुओं की गतियों पर, और उन गतियों द्वारा बदलते उनके आकर्षण बलों पर (क्योंकि यह बल दूरी पर निर्भर करता है।) अगर इसमें यह तथ्य भी जोड़ दिया जाये कि प्रकाश रेखा जो कि उन बिन्दुओं के दिखाई देने का एकमात्र स्रोत है वह भी आकाश में मौजूद आकर्षण बलों द्वारा अपने पथ से भटक जाती है तो चीजों के दिखाई देने का मामला और जटिल हो जाता है
 
इस तरह की चमत्कारिक निष्कर्षों तक हमें ले जाती है आइंस्टीन की जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी। आइंस्टीन ने अपने सिद्धान्त को एक समीकरण द्वारा व्यक्त किया जिसका हल एक लम्बे समय तक गणितज्ञों और भौतिकविदों के लिये चुनौती बना रहा। बाद में शिवर्ज़चाइल्ड नामक वैज्ञानिक ने पहली बार इसका निश्चित हल प्राप्त करने में सफलता पाई।
आइंस्टीन की समीकरणों को हल करने पर कुछ अनोखी चीज़ें सामने आती हैं। जैसे कि सिंगुलैरिटी (Singularity), ब्लैक होल्स (Black Holes) और वार्म होल्स (Wormhole)।

गुरुत्वीय क्षेत्रों में प्रकाश की चाल धीमी हो जाती है। यानि वक्त की रफ्तार भी धीमी हो जाती है।

दिक्‌-काल (Space Time) बताता है कि पदार्थ को कैसे गति करनी है और पदार्थ दिक्‌-काल को बताता है कि उसे कैसे कर्व होना (मुड़ना) है।

वर्तमान में आइंस्टीन की समीकरणों के कई हल मौजूद है जिनसे कुछ रोचक तथ्य निकलकर सामने आते हैं। जैसे कि गोडेल यूनिवर्स जिसमें काल यात्रा मुमकिन है। यानि भूतकाल या भविष्यकाल में सफर किया जा सकता है।
अब एक छोटी सी सिचुएशन पर डिस्कस करते हैं।
संलग्न चित्र पर विचार कीजिए। मान लिया हमारी पृथ्वी से कुछ दूर पर एक तारा स्थित है। उस तारे की रौशनी हम तक दो तरीके से सकती है। एक सीधे  पथ द्वारा। और दूसरी एक भारी पिण्ड से गुजरकर जो किसी और दिशा में जाती हुई तारे की रौशनी को अपनी उच्च ग्रैविटी (High Gravity) की वजह से मोड़ कर हमारी पृथ्वी पर भेज देता है। जबकि तारे से आने वाली सीढ़ी रौशनी की किरण एक ब्लैक होल द्वारा रुक जाती है जो कि पृथ्वी और तारे के बीच में मौजूद है। अब पृथ्वी पर मौजूद कोई दर्शक जब उस तारे की दूरी नापेगा तो वह वास्तविक दूरी से बहुत ज्यादा निकल कर आयेगी क्योंकि यह दूरी उस किरण के आधार पर नपी होगी जो पिण्ड द्वारा घूमकर दर्शक तक रही है। जबकि ब्लैक होल के पास से गुजरते हुए उस तारे तक काफी जल्दी पहुंचा जा सकता है। बशर्ते कि इस बात का ध्यान रखा जाये कि ब्लैक होल का दैत्याकार आकर्षण यात्री को अपने लपेटे में ले ले। इस तरह की सिचुएशन ऐसे शोर्ट कट् की संभावना बता रही है जिनसे यूनिवर्स में किसी जगह उम्मीद से कहीं ज्यादा जल्दी पहुंचा जा सकता है। इन शोर्ट कट् को भौतिक जगत में वार्म होल्स (Wormholes) के नाम से जाना जाता है।
ये एक आसान सी सिचुएशन की बात हुई। स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब हम देखते हैं कि पृथ्वी, पिण्ड, तारा, ब्लैक होल सभी अपने अपने पथ पर गतिमान हैं। ऐसे में कोई निष्कर्ष निकाल पाना निहायत मुश्किल हो जाता है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि ब्रह्माण्ड के रहस्यों (Mystery of Universe) की व्याख्या करने के लिये बनी आइंस्टीन की 'जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी' बहुत से नये रहस्यों को पैदा करती है।

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COMMENTS

BLOGGER: 35
  1. गजब की थ्योरी।

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  2. बहुत ही आसानी से आपने मुश्किल बात समझा दी, शुक्रिया, साइंस ब्लॉग पर ऐसी ही पोस्ट शोभा देती है

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  3. बहुत पठनीय ,जानकारी से भरी पोस्ट जो अन्तरिक्ष के साथ ही प्रकृति के कई रहस्यों को अनावृत करेगी !

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  4. ज़ीशान भाई, विज्ञान की कठिन से कठिन सिद्धांतों को आसान लफ्ज़ों में समझाना कोई आपसे सीखे। आपके इस हुनर की जितनी तारीफ की जाए, कम है।

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  5. ऐसा मत बोल ज़ालिम कुफ्र होगा. आइन्स्टीन पक्का यहूदी था.

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  6. आसानी से आपने मुश्किल बात समझा दी, शुक्रिया.बहुत पठनीय ,जानकारी से भरी पोस्ट.

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  7. thiyori psnd aayi or schayi bhi he . akhtar khan akela kota rajsthan

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  8. ये कुफ्र वाला कौन है?

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  9. बहुत बढ़िया और आसान तरीके से समझाई गई जानकारी , जीशान भाई इसके लिए आपका बहुत-२ आभार

    महक

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  10. एक भ्रम है
    "प्रकाश की चाल धीमी हो जाती है। यानि वक्त की रफ्तार"


    ........समय और प्रकाश अलग अलग हैं .तो प्रकाश की गति धीमी होने से समय की गति कैसे धीमी हो जाती है ?

    अगर उत्तर दे सकें तो अच्छा होगा

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    1. aaj universe prakash ki gati se bhi tej fail rha h. aur ham jante h ki prakash ki chaal is directly prapostional to the time (waqt). isliye aaj samay dheema ho gya h . aur isi vajah se ham bhavishya ki shair kar sakte h. kuki samay agar dheema ho gya h to universe m future creat ho chuka h. jb ham us samay pr pahuchenge tb vo hamara present hoga. isliye bhavishya ki shair karna mumkin h . (((((( einsite sahi h agar tab)))))

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  11. अंकित जी, आप ऐसी टोर्च की कल्पना करें जो अन्तरिक्ष में कहीं दस सेकंड में एक चक्कर लगा रही है. इस दशा में आप तक उसकी किरण दस सेकंड में एक बार पहुंचेगी. यानी बशर्ते की बीच में कोई भारी पिंड न हो. लेकिन अगर उच्च ग्रेविटी का कोई पिंड बीच में है तो वही किरण हो सकता है बीस सेकंड में एक बार पहुंचे. इस तरह वक़्त की रफ़्तार धीमी हो जाती है.

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  12. मैं तो ब्लैक होल के विचार को ही ब्लैक होल मानता हूं...ब्लैक होल थ्योरी को मैं स्वीकार नहीं पाता

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  13. जानकारी से भरी पोस्ट..आभार

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  14. @ जीशान भाई ,
    नज़रिया कैसे बदलेगा अगर पहले से ही बदला हुआ हो तो :)

    बड़ी शरारती पोस्ट है जनाब ज़ाकिर भाई भी अच्छी टिप्पणी को मजबूर हो गये :)

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  15. रोचक पोस्ट। धन्यवाद।

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  16. रोचक ढंग से लिखा गया लेख.. जानकारी प्रद.
    लेकिन अभी तक सांईटिस्ट यह निश्चित नहीं कर पाये कि कौन सी "ओरिजिन आफ़ यूनिवर्स" के लिये कौन सी थ्योरी सही है..

    द बिग बैंग थ्योरी
    द स्टेडी स्टेट थ्योरी
    द प्लसेटिंग थ्योरी

    मेरे हिसाब से आप द बिग बेंग थ्योरी पर आधारित जानकारी दे रहे हैं.

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  17. अली भाई,
    टाइटिल की गारंटी हमारे जाकिर भाई की है. मेरी तो सिर्फ पोस्ट की गारंटी है.

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  18. मोहिंदर भाई,
    आपने ठीक कहा. आइन्स्टीन की थ्योरी बिग बैंग के ज्यादा करीब है.

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  19. बहुत ही बेहतरीन और रोमांचक जानकारी दी है आपने जीशान भाई और वह भी बहुत ही सरल शब्दों में. आभार!

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  20. जिस बिन्दु के आसपास कुछ नहीं है,यहां तक कि जगह भी नहीं,तो फिर उस बिन्दु में विस्फोट कैसे हुआ? कोई तो आकर्षण या प्रतिकर्षण बल ज़िम्मेदार होगा इस विस्फोट के लिए!

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  21. अंकित जी, आप ऐसी टोर्च की कल्पना करें जो अन्तरिक्ष में कहीं दस सेकंड में एक चक्कर लगा रही है. इस दशा में आप तक उसकी किरण दस सेकंड में एक बार पहुंचेगी. यानी बशर्ते की बीच में कोई भारी पिंड न हो. लेकिन अगर उच्च ग्रेविटी का कोई पिंड बीच में है तो वही किरण हो सकता है बीस सेकंड में एक बार पहुंचे. इस तरह वक़्त की रफ़्तार धीमी हो जाती है.


    pehle to samay ki paribhasha ko tay karna hoga...

    what do we call 1 second?

    light travels 299,792,458 m in one second.
    means the time duration in which light travels the above distance is termed as 1 second. (I believe this is assumed here that distance travelled is in a straight line).

    Now this leads to a confusion, Considering the scenario given in the post, the path is not straight.

    Hence speed of time remains the same, as the distance is increased.

    Any comments?

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  22. योगेश जी, समय की रफ़्तार दूरी पर निर्भर नहीं होगी किन्तु प्रकाश के वेग पर अवश्य निर्भर करेगी.
    और गुरुत्वाकर्षण प्रकाश के वेग को बदल देता है.

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  23. I am still confused.
    we say

    speed = distance/time

    this is speed of physical object.

    How do we measure speed of time :)
    Do we have any formula to measure speed of time?

    Eistein had one..

    t=t0/sqrt(1-v2/c2)

    Itna kuchh hai vigyaan me, ke samajhte samajhte pagal ho jaye insaan...

    here how is v calculated when time itself is not absolute?

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  24. योगेश जी, इसे आप ऐसे समझें,
    अन्तरिक्ष में मौजूद टोर्च दस सेकंड में एक चक्कर लगा रही है. तो वहाँ से आने वाली प्रकाश की किरण हमारी पृथ्वी पर हर दस सेकंड पर एक पल्स देती है. जबकि प्रकाश की चाल है तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड.
    अब कल्पना कीजिये किन्ही कारण वश बीच में प्रकाश की चाल हो गई डेढ़ लाख किलोमीटर प्रति सेकंड. तो अब वही टोर्च हर बीस सेकंड बाद एक पल्स देती दिखाई देगी. जबकि वास्तव में वह दस सेकंड में ही पल्स दे रही है.

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  25. Priy Vigyani ji,
    humne aaj pahli baar apki ye site kholi, jise padhkar hum bahut hi jyada prabhavit huve hain. aur humein ish baat ka dukh bhi hai ki mujhe pahle iski jankari kyun nahi hui.
    Aaj dopahar e hi main aapki is site per baitha hoon. aur ab raat ke 11 bajne ko aaye hain to soncha ki kuchh aabhar to prakat hi kar du.

    Ji bahut Bahut Dhanyawad, itni achchhi achchhi post dene ke liye. aapke sabhi lekh jankariprad hain. aur aaj ke baad mujhe aapki is site ki jankari aur logo ko deni hai.

    Mahodaya ji,
    Main Einstein se bahut adhik prabhavit hoon. main unki sabhi theory ko, unke vicharo ko janna chahta hoon. E=mc2 aur theory of relativity(samanya aur vishisht siddhant) ki vyakhya yadi aap kar sake to main aapka sadaiv aabhari rahoonga.
    E=mc2 mein main ye janna chahta hoon ki einstein ke man mein kya bhav aaye honge?
    Ishke alava main ye bhi janna chahta hoon ki eak safal vigyanik ke kya lakchhad hote hain?
    Darasal main eak vigyanik banna chahta hoon. abhi main 10th ka student hoon. main eak aisa bhautik vigyanik banna chahta hoon jaise ke einstein the. main ye janta hoon ki unke jaisa koi oosra nahi ho sakta. per phir bhi main prayash karna cahta hoon. aur aaj pata nahi kyun jaie mujhe laga ki aap mera maargdarshan karne se na nahi karenge.
    anmol.kumar@live.in meri email id hai.

    Aasha hai ki aap apni site mein mere bataye topic mein likhenge aur mujhe nirash nahi karenge.

    ReplyDelete
  26. good morning sir.
    aap kripya karke mujhe ye bataye ki do alag-alag wiprit bate eak sath kese lagu ho sati hain. aap kahte hain ki-एक बिन्दु जिसके आसपास कुछ नहीं है। matalab uske aaspas khali जगह to hogi hi.phir aap kahte hain ki-उसके आसपास जगह भी नहीं है। matalab uske aaspas chijo ki bahut vid hai,jiske karan uske aaspas जगह v nahi bachti.
    wese ye theory achhi hai ,lekin mujhe thodi garbar lagti hai.aap ese thora samjha de to mere liae achha hoga, jese aapne dusro ko samjhaya hai.

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    Replies
    1. आप बिग बैंग को एक साधारण धमाके तरह से देख रहे हो लेकीन बिग साधारण धमाका नही था

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    2. क्योंकि आप बिग बैंग को साधारण धमाके की तरह सोचते हो लेकिन बिग बैंग कोई साधारण धमाका नही है वो स्पेस का धमाका है,

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  27. ये तो खुद को धोखा देने वाली के बाद हुई.

    वो तारा जो कि मान लीजिए 5 light year दूर था (shortcut से) और जिसे हमने 15 light year calculate किया था...... (क्यों कि प्रकाश सीधे न आ कर के, हमारे पास घूम के आ रहा था)

    अब समझिए, कि हमने यात्रा तो 5 light year की ही करी, तो इसमें अनोखा क्या किया....
    बस यही, कि जो हमें प्रतीत हो रहा था, वो वैसा नहीं था.... और हम कहने लगे हमने प्रकाश से अधिक गति से यात्रा कर ली...


    और दूसरी बात मुझे ये समझ में नहीं आई, की अगर प्रकाश की गति कम हो गयी, तो उस से समय की गति पर क्या और कैसे प्रभाव पड़ेगा,


    इसे भी उदहारण दे कर समझाएं तो बहुत मज़ा आएगा... :)

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  28. M was also a science student till graduation... n aisi thearies padhne aur padhane mei bada maza aata tha mujhe... instead of chemicals of chemistry...
    thank you so much iaisee theories ko itni assan language mei post karne ke liye... ye sab jaanna jitna jarooree hai utna hi unhe samjhna bhee...

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  29. I think you are confusing the audience.
    I dont' agree with your below statement.

    योगेश जी, इसे आप ऐसे समझें,
    अन्तरिक्ष में मौजूद टोर्च दस सेकंड में एक चक्कर लगा रही है. तो वहाँ से आने वाली प्रकाश की किरण हमारी पृथ्वी पर हर दस सेकंड पर एक पल्स देती है. जबकि प्रकाश की चाल है तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड.
    अब कल्पना कीजिये किन्ही कारण वश बीच में प्रकाश की चाल हो गई डेढ़ लाख किलोमीटर प्रति सेकंड. तो अब वही टोर्च हर बीस सेकंड बाद एक पल्स देती दिखाई देगी. जबकि वास्तव में वह दस सेकंड में ही पल्स दे रही है.


    Speed of light kam ho gayii, to 1.5 lac km/s

    The interval of giving the pulse still remains 10 sec, when viewed standing near the torch. And the interval will remain 10 seconds when seen from earth as well.

    Aap keh rahe hain, ke that torch is at a distance of 10 light seconds.

    The distance remains the same, but speed of light is reduced to half. So the time taken by light to reach earth is doubled. But my dear, interval as viewed from earth will still remain 10 seconds, though, it will be viewed after 20 seconds from its dispatch. Do you agree?

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  30. sir mene aaj tak lagbhag 100 sejayada sites per theories padi hai per sabe muje 99.99% bate galat lagi hai kyonki me astronomy kar raha hu mene staphen hawking,nick pope,mikhal kaku,hakeemolsky mene unke bare me pada hai per har bar space me travel ke bare me muje hamesa hi galat lagi hai ki hum black hole se aur worm hole se time travel ker sakte hai per ye sab bakvaas hai like-''es theory me kaha hai ki ek kan jiske aaspas koi khali jagah nahi hogi to bhi vo blast kar ke kudbkhud jagah bana llega''
    but my fact jab space me khuch hai hi nahi to hum use mod kise sakte hai mana ki kisi chij ko modne ke liye koi medium chaiye per space me kuch jo pura khali hai hum use kese mod sakte hai
    per mene kai logo se suna hai ki hum black hole ke pass jaker uski gravity ki maddad se space mod sakte hai per sab bacvaashai
    so please khuch bhi likane se pahle shoch samaj ker likhe kioki koi bhi ese sach man ker apne vhichar chage kar dega aur iseliye hum aaj science ki race me bahut phiche hai
    AGER KUCH JYADDA JANNA HO TO MUJE EMAIL KER SAKTE HO -HITURAO21@GMAIL.COM

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- दर्शन लाल बावेजा,1,- बी एस पाबला,1,-Dr. Prashant Arya,2,-अंकित,4,-अंकुर गुप्ता,7,-अभिषेक ओझा,2,-अल्पना वर्मा,22,-आशीष श्रीवास्‍तव,2,-इन्द्रनील भट्टाचार्जी,3,-काव्या शुक्ला,2,-जाकिर अली ‘रजनीश’,56,-जी.के. अवधिया,6,-जीशान हैदर जैदी,45,-डा प्रवीण चोपड़ा,4,-डा0 अरविंद मिश्र,26,-डा0 श्‍याम गुप्‍ता,5,-डॉ. गुरू दयाल प्रदीप,8,-डॉ0 दिनेश मिश्र,5,-दर्शन बवेजा,1,-दर्शन लाल बवेजा,7,-दर्शन लाल बावेजा,2,-दिनेशराय द्विवेदी,1,-पवन मिश्रा,1,-पूनम मिश्रा,7,-बालसुब्रमण्यम,2,-योगेन्द्र पाल,6,-योगेश,1,-रंजना [रंजू भाटिया],22,-रेखा श्रीवास्‍तव,1,-लवली कुमारी,3,-विनय प्रजापति,2,-वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई),81,-शिरीष खरे,2,-शैलेश भारतवासी,1,-संदीप,2,-सलीम ख़ान,13,-हिमांशु पाण्डेय,3,.संस्‍था के उद्देश्‍य,1,।NASA,1,(गंगा दशहरा),1,100 billion planets,1,2011 एम डी,1,22 जुलाई,1,22/7,1,3/14,1,3D FANTASY GAME SPARX,1,3D News Paper,2,5 जून,1,Acid rain,1,Adhik maas,1,Adolescent,1,Aids Bumb,1,aids killing cream,1,Albert von Szent-Györgyi de Nagyrápolt,1,Alfred Nobel,1,aliens,1,All india raduio,1,altruism,1,AM,18,Aml Versha,1,andhvishwas,5,animal behaviour,1,animals,1,Antarctic Bottom Water,1,Antarctica,9,anti aids cream,1,Antibiotic resistance,1,arunachal pradesh,1,astrological challenge,1,astrology,1,Astrology and Blind Faith,1,astrology and science,1,astrology challenge,1,astronomy,4,Aubrey Holes,1,Award,4,AWI,1,Ayush Kumar Mittal,2,bad effects of mobile,1,beat Cancer,1,Beauty in Mathematics,1,Benefit of Mother Milk,1,benifit of yoga,1,Bhaddari,1,Bhoot Pret,3,big bang theory,1,Binge Drinking,1,Bio Cremation,1,bionic eye Veerubhai,1,Blind Faith,4,Blind Faith and Learned person,1,bloggers achievements,1,Blood donation,1,bloom box energy generator,1,Bobs Award,1,Breath of mud,1,briny water,1,Bullock Power,1,Business Continuity,1,C Programming Language,1,calendar,1,Camel reproduction centre,1,Carbon Sink,1,Cause of Acne,1,Change Lifestyle,1,childhood and TV,1,chromosome,1,Cognitive Scinece,1,comets,1,Computer,2,darshan baweja,1,Deep Ocean Currents,1,Depression Treatment,1,desert process,1,Dineshrai Dwivedi,1,DISQUS,1,DNA,3,DNA Fingerprinting,1,Dr Shivedra Shukla,1,Dr. Abdul Kalam,1,Dr. K. 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Science Bloggers' Association: जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटिविटी: ब्रह्माण्‍ड के रहस्‍यों की अद्भुत व्‍याख्‍या।
जनरल थ्‍योरी ऑफ रिलेटिविटी: ब्रह्माण्‍ड के रहस्‍यों की अद्भुत व्‍याख्‍या।
अल्‍बर्ट आइन्स्टीन (Albert Einstein) की जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी की आसान व्याख्या।
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