सन 2070 में लिखा गया एक पत्र, मानवता के नाम! Water is life!!! -सलीम ख़ान

Science Bloggers' Association की स्थापना के 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस शुभअवसर पर अध्यक्ष श्री अरविन्द मिश्र जी सहित सभी पदाधिकारियों...

Science Bloggers' Association की स्थापना के 1 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस शुभअवसर पर अध्यक्ष श्री अरविन्द मिश्र जी सहित सभी पदाधिकारियों, लेखकों और पाठकों को हार्दिक शुभकामनायें. मेरा इससे जुडना और ऐन इसी वक़्त मेरा पहला लेख प्रकाशित होना मुझे गौरव का एहसास दिला रहा है. बस दरकार है आपकी मोहब्बत की, आपके साथ की. -सलीम ख़ान


यह सन 2070 है!

मैं पचास वर्ष का हो चुका हूँ, लेकिन मुझे देख कर जैसे लगता है कि मैं 85 का हूँ! मुझे किडनी की बिमारी है क्यूंकि मझे पीने के लिए पर्याप्य पानी नहीं मिलता है. मुझे भय है कि मैं अब ज़्यादा समय तक ज़िन्दा नहीं रह पाउँगा. मैं अपने सोसाईटी के सबसे बूढ़े व्यक्तियों में से एक हूँ.

मुझे याद है जब मैं मात्र 5 वर्ष का था. उस वक़्त सबकुछ कितना बदला हुआ था. कितना मनोहर था. उस ज़माने में कितने सारे पार्क हुआ करते थे, घर में खुबसूरत बागीचा हुआ करता था...और... और मैं आधे-आधे घंटे तक फौहारे (shower) में नहाता रहता था. आज कल हम लोग अपने शरीर की त्वचा को स्वच्छ करने के लिए 'मिनरल तौलिया' (towels with mineral oil) का प्रयोग करते हैं.

पहले औरतों व लड़कियों के ख़ूबसूरत और लम्बे-लम्बे बाल हुआ करते थे लेकिन अब वे सिर को साफ़ और स्वच्छ रखने के लिए बिना पानी के ही मुंडाना (shave) पड़ता है.

तब मेरे पिताजी हमारी कार को हौज़पाइप के पानी से धोते और साफ़ करते थे लेकिन अब मेरा बेटा इन बातों पर विश्वाश ही नहीं करता है कि पानी इतना व्यर्थ भी किया जाता होगा!

मुझे याद है उस वक़्त पानी बचाएं (SAVE WATER) की चेतावनी पोस्टर्स, रेडियो, टीवी और साईंस ब्लोगर्स एसोसिअशन (Science Bloggers' Association) पर हम लोगों को दी जाती थीं. अब सारी की सारी नदियाँ, झीलें, बाँध और ज़मीन के अन्दर का पानी या तो सूख चुका है या फ़िर दूषित हो चुका है.

उद्योग लगभग ठप हो चुका है और बेरोजगारी अपने भयानक नाटकीय अनुपात में पहुँच चुकी है और वर्तमान काल में रोज़गार का मुख्य स्रोत सिर्फ़ 'अलवणीकरण संयंत्र रोजगार' ही है और वेतन के रूप में पीने-योग्य पानी ही मिलता है.

एक गैलन पानी के लिए सडकों पर  आपस में गोलियां चलना अब आम बात हो चुकी है. खाद्य-पदार्थ अब 80% कृत्रिम (synthetic) हैं.
मुझे याद है पहले एक दिन में एक व्यस्क व्यक्ति को कम से कम 8 गिलास पानी पीने के लिए सलाह दी जाती थी और आजकल हमें एक दिन में मात्र आधा गिलास पानी ही पीने को मिल पाता है. हमें पहनने के लिए disposable कपड़े मिलते हैं जिसके कारण कूड़े की मात्रा अपने चरम सीमा पर पहुँच चुकी है. अब हम सेप्टिक टैंक प्रयोग कर रहे हैं क्योंकि सीवरेज प्रणाली को पानी की कमी के कारण प्रयोग नहीं किया जाता है.

जनसँख्या की स्थिति अपने भयावह स्थिति पर पहुच चुकी है. हम लोगों का शरीर देख कर रोयें काँप उठते हैं. शरीर झुर्रियों से परिपूर्ण! निर्जलीकरण के कारण हमारे शरीर सूखे हुए है! ओजोन परत के संरक्षित न रहने के कारण  अल्ट्रा वायलेट विकिरण से घावों से भरा हुआ शरीर! वर्तमान में मृत्यु का मुख्य कारण त्वचा कैंसर, जठरांत्र संबंधी संक्रमण और मूत्र रोग होते हैं.

त्वचा के अत्यधिक रूप से सूखने की वजह से 20 वर्ष का युवा 40 वर्ष का नज़र आता है. वैज्ञानिक इन सब समस्याओं का समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अभी तक उन्हें कोई सफलता हाथ नहीं लगी.

पानी को पैदा नहीं किया जा सकता है और ऑक्सीजन भी पेड़ों और वनस्पति की कमी की वजह से कम होती जा रही है. नई पीढ़ी की बौद्धिक क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है. पुरुषों में शुक्राणुओं की संरचना भी बुरी तरह प्रभावित हुई है जिसके परिणामस्वरूप बच्चे शारीरिक विकृति के साथ पैदा होते हैं.
"सरकार से हमें सांस लेने योग्य हवा ख़रीदनी पड़ती है, जो कि मात्र 137 m3 प्रति दिन प्रति व्यस्क व्यक्ति के लिए ही है. जो लोग इसका भुगतान नहीं कर पाते हैं उन्हें 'हवादार क्षेत्र' से निष्काषित कर दिया जाता है. हवादार संयत्र, सौर ऊर्जा से संचालित एक बहुत विशाल यांत्रिक फेफड़े होते हैं. हवा की गुणवत्ता बिलकुल भी अच्छी नहीं लेकिन कम से कम लोग सांस तो ले सकते हैं."
औसतन लोग 35 वर्ष तक का जीवन ही जी पाते हैं.

कुछ देश या क्षेत्र जो अभी भी थोड़े बहुत हरे भरे हैं और नदियाँ हैं, वह भारी संख्या में सैनिकों द्वारा संरक्षित हैं, और वहां इतनी सुरक्षा है जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता है. सोना और हीरे से भी अधिक क़ीमती पानी, एक बहुत ही प्रतिष्ठित खजाना बन गया है.

जहाँ मैं रहता हूँ वहाँ बारिश की कमी के कारण एक भी पेड़ नहीं है और जब वर्षा होती भी है तो वह सामान्य न होकर अम्ल वर्षा होती है. भीषण परमाणु परिक्षण और 20वीं सदी के उद्योगों के कचरे और प्रदुषण से मौसम गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं. हम लोगों को पर्यावरण सम्बन्धी चेतावनियाँ दी जाती थीं लेकिन किसी ने भी उस पर ध्यान ही नहीं दिया.

अपने बेटे को जब मैं अपनी जवानी के बारे में बताता हूँ कि उस वक़्त कितनी हरियाली थी, सुन्दर सुन्दर फूल थे, नदियाँ थी जिनमें हम तैरते थे, मछलियाँ पकड़ते थे, कितने स्वस्थ रहते थे, कितनी सुन्दर बारिश होती थी... तो उसे मेरी बातों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं होता है.

वह मुझसे पूछता है कि- ऐसा कैसे हो गया? क्यूँ अब पानी नहीं है??

तब मेरा गला भर्रा उठता है और मैं जवाब-विहीन हो जाता हूँ.
मुझे शर्म महसूस होती है कि मैं उस पीढ़ी से वाबस्ता हूँ जिसके खाते में बस चेतावनी ही चेतावनी  हैं व जिसने इस भयानक विनाश में योगदान दिया है, जिसकी भारी क़ीमत हमारे बच्चे चुका रहें हैं. अब मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि पृथ्वी पर जीवन अब कुछ ही समय तक रहेगा क्यूंकि प्राकृतिक विनाश अब अपने अपरिवर्तनीय स्वरुप में हैं.

अब मैं लोगों को समझाने के लिए कैसे वापस जा सकता हूँ!!!???...

कैसे???

कैसे???


.........अभी भी वक़्त है हम संभल जाएँ! शुक्र है, हमारे पास अभी भी वक़्त है!!

हमारे पास अभी भी वक़्त है!!!
-सलीम ख़ान

This is the first article of Saleem Khan for SBA, inspiration: APJ Abdul Kalam. 

COMMENTS

BLOGGER: 36
  1. होश मे आओ यारो , न तो बिन नीर एक दिन दुनिया सुनी .

    अदभुत लेख ....

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्दर और अद्भुत लेख, सार्थक पहल

    ReplyDelete
  3. हमारे पास अभी भी वक्त है
    सार्थक और जनोपयोगी चेतावनी
    सलीम जी का आभार

    प्रणाम

    ReplyDelete
  4. सचमुच, हम जानते हुए भी अक्सर पानी का अपव्यय करते रहते हैं।
    अगर अभी नहीं चेते, तो फिर शायद हमें पछताने के लिए भी वक्त न मिले।

    ReplyDelete
  5. अद्भुत ......

    परंतु ठीक इसी कन्टेन्ट के साथ इंग्लिश मे मैंने ए.पी.जे.अब्दुल कलाम की बनायी स्लाइड शो देखी थी..वह स्लाइड शो मेरे पास है भी..सलीम भाई को उनका आभार व्यक्त करना था..

    ReplyDelete
  6. .........अभी भी वक़्त है हम संभल जाएँ!

    ReplyDelete
  7. भविष्य का प्रभावशाली प्रोजेक्शन

    ReplyDelete
  8. आपने बहुत अच्छी कल्पना की जो सोचने पर मजबूर कर दे रही है साथ ही आपकी लेखन शैली भी लाजवाब है

    ReplyDelete
  9. धन्यवाद, अरविन्द जी!

    ReplyDelete
  10. सार्थक पहल...

    अभी भी वक़्त है... संभल जाएँ..

    ReplyDelete
  11. बडा हास्यास्पद लगा पढ के । लिखनेवाला अभी पैदा ही नही हुआ है , 2020 मे पैदा होगा । खैर लेख का जो उद्देश्य था वह इस ब्लाग पर फिट नही बैठता है ,यहॉ पर तो पानी के विकल्प पर चर्चा होनी चाहिये , विज्ञान पानी के विकल्प के रूप मे क्या खोज करता है - ये एक सकारात्मक दृश्टिकोण होगा । अगर विज्ञान ने पानी के शुद्धीकरण , रीयूटीलाइजेशन की तकनीक इजाद न की होती तो आज ही स्थिति खराब होती , पुर्वजो ने हमारे लिये क्या संसाधन बनाया या छोडा है उस पर रोने के बजाय हमे अपना रास्ता बनाना चाहिये और यही काम हर आने वाली पीढी करेगी तो पानी का अपव्यय उतनी बडी समस्या नही है जितना विकल्प का ना खोजा जाना ।

    ReplyDelete
  12. कुछ लोग सिर्फ़ आधे भरे हुए पानी के गिलास को आधा ख़ाली के रूप में ही देखते हैं.

    ReplyDelete
  13. सत्येंद्र जी, इस ब्लॉग का उददेश्य है लोगों को वैज्ञानिक जानकारी देना और वैज्ञानिक चेतना जगाना। और जहां तक इस पोस्ट का उददेश्य की बात है, वह था पानी की कमी के बारे में लोगों को सोचने के लिए मजबूर करना। और मेरी समझ से भी यह पोस्ट इतना काम भलीभांति कर रही है।
    जहाँ तक शैली की बात है, इस तरह की शैली विज्ञज्ञन कथाओं में खूब प्रयोग में लाई जाती है।

    ReplyDelete
  14. भविष्य के बहुत बड़ी बात को बताती सरल सुन्दर रूप से लिखी गया लेख ..सभी जानते हैं इस बात को पर समझना कोई नहीं चाहता ..वक़्त रहते सब सचेत हो जाए तो अच्छा है ..

    ReplyDelete
  15. पानी की कमी के बारे में लोगों को बताना कोइ वैज्ञानिक चेतना नही है और यदि आप इसे वैज्ञानिक चेतना समझते है तो कोइ भी सामाजिक चेतना ,वैज्ञानिक चेतना होगी ।जहाँ तक शैली की बात है साइन्स फिक्शन को प्रोजेक्शन के तौर पर आप प्रस्तुत नही कर सकते है और यदि कोइ प्रोजेक्शन है तो वह फिक्शन नही होगा । मेरे विचार से साइन्स के नान-हाइपोथेटीकल एनालिसिस को ही प्रमुखता देनी चाहिये ।

    ReplyDelete
  16. "वैज्ञानिक चेतना, सामाजिक चेतना का ही अंग है."

    ReplyDelete
  17. Satyendra Kumar ji

    kya aapko lagta hai ki technology har samasya ko solve kar sakti hai?

    samasya technology ki kami hai ya life style?

    aur hume dhayan kis par dena chahiye technology par ya life style par?

    agar koi vikalp khj bhi liye gaye aur life style nahi badli to hume kewal kuch saal hi milenge samadhan nahi.

    Aisa mera manna hai

    aapka kya manna hai?

    ReplyDelete
  18. अपने ज्ञान, चिंतन और बुद्धि का आपने सार्थक उपयोग किया है. आप स्वयं ही देखेंगे कि एक सलीम खान जो कि वैमनस्य फैला रहा था, उसे एक-दो को छोड़ कर सबने गालियाँ दीं, पर यहाँ पर सब आपके सम्मान में झुके हैं.
    सलीम, आपको स्वयं चुन लेना चाहिए कि जाकिर नायक बन कर आप इस्लाम की एकमात्र सेवा और अन्य धर्मों को बुरा-बुरा साबित करते रहेंगे या कलाम साहब की तरह देश-भक्त बनेंगे.
    :)
    सदैव शुभ कार्य करें और सदैव सभी का प्रेम और आशीर्वाद प्राप्त करते रहें.
    शुभकामनाओं के साथ,
    ई-गुरु राजीव.

    ReplyDelete
  19. भविष्य के कुछ वास्तविक चित्र खिंच गये हैं यहाँ । आलेख अपनी शैली के कारण सुन्दर लगा । आपके पहले आलेख के लिये बधाई और आगत की शुभकामनायें ।

    ReplyDelete
  20. क्या बात करते है ऐसा भी वक्त आने वाला है.. इंतज़ार रहेगा.. पानी बिन दुनिया देखने का.. :(

    बहुत उम्दा आलेख.. सलीम भाई, बहुत बधाई..

    ReplyDelete
  21. सलीम साहब, आप एक अच्छा साइन फिक्शन भी लिख सकते हैं.

    ReplyDelete
  22. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  23. @zishaan ziadi jee, Insha Allah zaroor !!! Shukriya hausla afzaaee ka !!!

    ReplyDelete
  24. जीशान जी, आपने मेरे मुँह की बात कह दी, शुक्रिया।
    मैं ये बात अपने पहले ही कमेंट में कहना चाहता था, लेकिन फिर सोचा कि कहीं ज्यादा तारीफ सुनकर सलीम भाई फूल कर कुप्पा न हो जाएं, इसलिए रह गया। वैसे इस तरह का संकोच सही नहीं है, क्योंकि जिंदगी में ऐसे मौके बहुत कम आते हैं जब हम दूसरों की दिल से तारीफ कर सकें। इसलिए ऐसे मौकों को गंवाना नहीं चाहिए, भविष्य में मैं ध्यान रखूंगा।

    ReplyDelete
  25. प्रिय अंकित जी
    आपकी जिज्ञासा के क्रम मे ............
    1- अपनी समस्याओ के समाधान को हमे स्वय खोजना होगा अगर आप इसके माध्यम को तकनीक का नाम देते है हो सकता है
    2- लाइफ-स्टाइल की कोइ समस्या नही होती है , समस्या सदैव उद्देश्य की होती है - आप कैसे जीना चाहते है ? यह बात आपके सामने कुछ समस्या रखेगा और आपको उनका समाधान खोजना है क्युकि आप वही चाहते है , अगर कोइ आदमी मरना चाहता है तो आपके सारे जीवन के साधन उसके लिये बेकार है और उसके मरने मे बाधक बनने वाली चीजे उसके लिये समस्या है
    3- हम लाइफ-स्टाइल के लिये नही जीते है , हम जीते है तो उपलब्ध साधनो से अपना तरीका बना लेते है जिसे लाइफ-स्टाइल कहते है , विद्दुत की खोज प्रकाश के विकल्प के रूप मे की गयी थी न की "दिये" की लाइफ-स्टाइल को "झालर" की लाइफ-स्टाइल से बदलने के लिये , यह परिवर्तन तो स्वत: है ( परिणामगत है ), बल्ब का अविश्कार एक क्रांतिकारी खोज है ,अब आप उसका आकार बदल दे, इंटेंसिटी बढा दे ,कलर बदल दे यह स्टाइल का मामला - आपकी च्वाइस का मामला है ।

    ReplyDelete
  26. बहुत अच्छी बात उठाई है आपने. लेकिन इसके लिये भारत की अबाध रूप से बढ़ती हुई जनसंख्या एक बड़ा कारण है. विगत साठ वर्षों में तीन सौ प्रतिशत हो गई है हमारी जनसंख्या, यदि इस पर काबू नहीं पाया गया तो निश्चित ही प्रलय हो जायेगी.

    ReplyDelete
  27. भारतीय नागरिक - Indian Citizen जी आपसे सहमत, और इसमें इजाफा यह करना चाहता हूँ कि जनसँख्या (हालाँकि यह सन्दर्भ-रहित टीप है) के मद्देनज़र चीन की ही तरह अगर सख्त क़ानून बने तो बेहतर है... वैसे हम नज़र डालते हैं कि कुछ समझदार और पढ़े लिखे लोग एक, दो या तीन बच्चे पैदा करते हैं... उनके बारे में आप कह सकते हैं कि वह जनसँख्या नियंत्रण में सहयोग कर रहे हैं.... हाँ जागरूकता तो हुई है...लेकिन असल में इसकी एक वजह यह है कि वे इस महंगाई के दौर में अपने स्टेटस को मेंटेन करते रहने के कारण ऐसा कर रहें हैं...

    ReplyDelete
  28. @Satyendra Kumar s

    and

    @

    yes yahi to main kah raha hoon ki ye jo pasand hai ki kis cheej ko kis tarah upyog karna hai isi ko to 'Life style kahte hain'

    jaise USA ke log 1 maheene me jitna pani flesh kar dete hain utna pani pure africa ke log pine me upyog karnte hain 1 maheene tak
    samasya jan sankhya ki bhi nahi hai

    ye samasya life style ki nahi to kya hai


    ab aap kitne bhi avishkar kar lijiye samasya to bani hi rahegina

    ReplyDelete
  29. @भारतीय नागरिक - Indian Citizen
    upar likhe comment ko 1 bar padh lijiye

    aur phir bataiye

    ReplyDelete
  30. hamare nabi ne bahut pahle kaha tha:

    khah samundar k kinaare kyon na baithe ho aur khaah wazu kyon na kar rahe ho paani kam se kam kharch karo.

    lekin aaj ham fizul k kaamon k liye bhi kitna pani baha dete hain.

    kalpna aapki thik hai!

    ReplyDelete
  31. अरसा पहले मुज़फ्फर हनफ़ी साहब की एक ग़ज़ल पढ़ी थी। ग़ज़ल लीक से हट कर है। देखें:-

    ऊदी कलियां, भीनी पीपल, उगता चांद, खनकता पानी /
    हरा समंदर, गोपी चंदर, बोलो मछली कितना पानी //

    दो बूंदों की हसरत लेकर चुप टीले पर रेत खड़ी थी /
    चारों जानिब घुंघरु बांधे रिमझिम-रिमझिम बरसा पानी //

    जी हां मैंने भी देखा था उसका कोई दोष नहीं है /
    जब शोलों का नाच हुआ था, काफ़ी दूर खड़ा था पानी //

    सूखी शाखें सोच रही हैं, अब आने से क्या होता है /
    पत्ते ताली पीट रहे हैं, आया पानी आया पानी //

    फुलवारी में झिलमिल-झिलमिल चांद किरन कब तक ठहरेंगी /
    मैं बस के चक्कर में बैठा, काट रहा हूं काला पानी //

    हाल अंधेरा गुप है, लेकिन मुस्तकबिल की आस के जुगनू /
    मेरी जलती पेशानी पर डाल रहे है टण्डा पानी //

    अकसर उसकी याद आती है रौ में तेजी आ जाती है /
    वह परबत की ऊंची चोटी, मैं झरने का बहता पानी //

    ReplyDelete
  32. बहुत सी असन्गत बातें हैं--जब बौद्धिक क्षमता कम, बच्चे विकलान्ग पैदा होरहे हैं तो ---मिनरल तौलिया,
    अलवणीकरण यन्त्र, मशीनी फ़ेंफ़डे ,डिस्पोसेबल कपडे कौन बना रहा है?( शायद यह सब सिर्फ़ भारत मैंहोरहा है, यन्त्रअमरीका से आरहे हैं)क्या इतने कम बद्धिक स्तर के मानव में शर्म महसूस करने की भावना बची है?
    कहानी लिखने के लिये यथातथ्य समझ होनी चाहिये।
    सत्येन्द्र व अन्कित के तर्क सही हैं
    ----परन्तु लेखक की भावना अच्छी है।

    ReplyDelete
  33. ---एक छप्पय छंद मुलाहिज़ा फ़रमाएं--

    ’आयेगी वह सदी जब,जल कारण हों युद्ध,
    सदियों पहले भी हुए जल के कारण युद्ध।
    उन्नत मानव हुआ,प्रिक्रिति सह भाव बनाया,
    कुए बावडी ताल बने, जन मन हरषाया। निज सुखसुख हित जो नाश प्रक्रिति का मनुज करता नहीं।
    जल कारण फ़िर युद्ध पतन की बात सुन सकता कहीं ॥’

    ReplyDelete

Name

- दर्शन लाल बावेजा,1,- बी एस पाबला,1,-Dr. Prashant Arya,2,-अंकित,4,-अंकुर गुप्ता,7,-अभिषेक ओझा,2,-अल्पना वर्मा,22,-आशीष श्रीवास्‍तव,2,-इन्द्रनील भट्टाचार्जी,3,-काव्या शुक्ला,2,-जाकिर अली ‘रजनीश’,56,-जी.के. अवधिया,6,-जीशान हैदर जैदी,45,-डा प्रवीण चोपड़ा,4,-डा0 अरविंद मिश्र,26,-डा0 श्‍याम गुप्‍ता,5,-डॉ. गुरू दयाल प्रदीप,8,-डॉ0 दिनेश मिश्र,5,-दर्शन बवेजा,1,-दर्शन लाल बवेजा,7,-दर्शन लाल बावेजा,2,-दिनेशराय द्विवेदी,1,-पवन मिश्रा,1,-पूनम मिश्रा,7,-बालसुब्रमण्यम,2,-योगेन्द्र पाल,6,-योगेश,1,-रंजना [रंजू भाटिया],22,-रेखा श्रीवास्‍तव,1,-लवली कुमारी,3,-विनय प्रजापति,2,-वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई),81,-शिरीष खरे,2,-शैलेश भारतवासी,1,-संदीप,2,-सलीम ख़ान,13,-हिमांशु पाण्डेय,3,.संस्‍था के उद्देश्‍य,1,।NASA,1,(गंगा दशहरा),1,100 billion planets,1,2011 एम डी,1,22 जुलाई,1,22/7,1,3/14,1,3D FANTASY GAME SPARX,1,3D News Paper,2,5 जून,1,Acid rain,1,Adhik maas,1,Adolescent,1,Aids Bumb,1,aids killing cream,1,Albert von Szent-Györgyi de Nagyrápolt,1,Alfred Nobel,1,aliens,1,All india raduio,1,altruism,1,AM,18,Aml Versha,1,andhvishwas,5,animal behaviour,1,animals,1,Antarctic Bottom Water,1,Antarctica,9,anti aids cream,1,Antibiotic resistance,1,arunachal pradesh,1,astrological challenge,1,astrology,1,Astrology and Blind Faith,1,astrology and science,1,astrology challenge,1,astronomy,4,Aubrey Holes,1,Award,4,AWI,1,Ayush Kumar Mittal,2,bad effects of mobile,1,beat Cancer,1,Beauty in Mathematics,1,Benefit of Mother Milk,1,benifit of yoga,1,Bhaddari,1,Bhoot Pret,3,big bang theory,1,Binge Drinking,1,Bio Cremation,1,bionic eye Veerubhai,1,Blind Faith,4,Blind Faith and Learned person,1,bloggers achievements,1,Blood donation,1,bloom box energy generator,1,Bobs Award,1,Breath of mud,1,briny water,1,Bullock Power,1,Business Continuity,1,C Programming Language,1,calendar,1,Camel reproduction centre,1,Carbon Sink,1,Cause of Acne,1,Change Lifestyle,1,childhood and TV,1,chromosome,1,Cognitive Scinece,1,comets,1,Computer,2,darshan baweja,1,Deep Ocean Currents,1,Depression Treatment,1,desert process,1,Dineshrai Dwivedi,1,DISQUS,1,DNA,3,DNA Fingerprinting,1,Dr Shivedra Shukla,1,Dr. Abdul Kalam,1,Dr. K. N. Pandey,1,Dr. shyam gupta,1,Dr.G.D.Pradeep,9,Drug resistance,1,earth,28,Earthquake,5,Einstein,1,energy,1,Equinox,1,eve donation,1,Experiments,1,Facebook Causes Eating Disorders,1,faith healing and science,1,fastest computer,1,fibonacci,1,Film colourization Technique,1,Food Poisoning,1,formers societe,1,gauraiya,1,Genetics Laboratory,1,Ghagh,1,gigsflops,1,God And Science,1,golden number,2,golden ratio,2,guest article,9,guinea pig,1,Have eggs to stay alert at work,1,Health,72,Health and Food,14,Health and Fruits,1,Heart Attack,1,Heel Stone,1,Hindi Children's Science Fiction,1,HIV Aids,1,Human Induced Seismicity,1,Hydrogen Power,1,hyzine,1,hyzinomania,1,identification technology,2,IIT,2,Illusion,2,immortality,2,indian astronomy,1,influenza A (H1N1) virus,1,Innovative Physics,1,ins arihant,1,Instant Hip Hain Relief,1,International Conference,1,International Year of Biodiversity,1,invention,5,inventions,30,ISC,2,Izhar Asar,1,Jafar Al Sadiq,1,Jansatta,1,japan tsunami nature culture,1,Kshaya maas,1,Laboratory,1,Ladies Health,5,Lauh Stambh,1,leap year,1,Lejend Films,1,linux,1,Man vs.Machine,1,Manish Mohan Gore,1,Manjeet Singh Boparai,1,MARS CLIMATE,1,Mary Query,2,math,1,Medical Science,2,Memory,1,Metallurgy,1,Meteor and Meteorite,1,Microbe Power,1,Miracle,1,Misconduct,3,Mission Stardust-NExT,1,MK,73,Molecular Biology,2,Motive of Science Bloggers Association,1,Mystery,1,Nature,1,Nature experts Animal and Birds,1,Negative Effects of Night Shift,1,Neuroscience Research,1,new technology,1,NKG,4,open source software,1,Osmosis,1,Otizm,1,Pahli Barsat,1,pain killer and pain,1,para manovigyan,1,PCST 2010,5,pencil,1,Physics for Entertainment,1,PK,2,Plagiarism,5,Prey(Novel) by Michael Crichton,1,Pshychology,1,psychological therapy in vedic literature,1,Puberty,1,Rainbow,1,reason of brininess,1,Refinement,1,Research,4,Robotics,1,Safe Blogging,1,Science Bloggers Association as a NGO,2,science communication through blog writing,4,Science Fiction,16,Science Fiction Writing in Regional Languages,1,Science Joks,1,Science Journalism and Ethics,3,Science News,2,science of laughter,1,science project,1,Science Reporter,1,Science Theories,9,scientific inventions,2,Scientist,47,scientists,1,Search Engine Volunia,1,Secret of invisibility,1,Sex Ratio,1,Shinya Yamanaka,1,SI,1,siddhi,1,Solar Energy,1,space tourism,1,space travel,1,Spirituality,1,Stem Cell,1,Stephen Hawking,1,stonehenge mystery,1,Summer Solstice,1,Sunspots and climate,1,SuperConductivity,1,survival of fittest,1,sweet 31,1,Swine flue,1,taantra siddhee,1,tally presence system,1,Tantra-mantra,1,technical,1,technology,18,telomerase,1,Theory of organic evolution,1,Therapy in Rig veda,1,tokamak,1,Top 10 Blogger,1,Transit of Venus,1,TSALIIM Vigyan Gaurav Samman,1,tsunami warning,1,Tuberculosis Bacillus,1,tyndall effect,1,universe,14,Urdu Science Fiction Writer,1,vedic literature,1,VIDEO BOOK,1,Vigyan Pragati,1,Vigyan Prasar,1,Vision,1,Vividh Bharti,1,water,1,Web Technology,1,Wild life,3,Women Empowerment,1,Workshop,5,World Health Day,1,World no tobacco day,1,world trade center,1,Wormhole concept,1,Ya Perelman,1,yogendra,2,π,1,अंक,1,अंक गणित,1,अंतरिक्ष,1,अंतरिक्ष में सैर सपाटा,1,अंतरिक्ष यात्रा,1,अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन,1,अतिचालकता,1,अतीन्द्रिय दृष्टि,1,अतीन्द्रिय बोध,1,अथर्ववेद,1,अंध-विश्वास,2,अंधविश्‍वास,1,अंधविश्वास को चुनौती,3,अधिक मास,1,अध्यात्म,1,अनंत,1,अनसुलझे रहस्य,1,अन्तरिक्ष पर्यटन,3,अन्धविश्वास,3,अन्धविश्वास के खिलाफ,1,अभिषेक,8,अभिषेक मिश्र,4,अमरता,1,अम्ल वर्षा,1,अयुमु,1,अरुणाचल प्रदेश,1,अर्थ एक्सपेरीमेंट,3,अर्शिया अली,1,अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी,1,अलौकिक संगीत,1,अवसाद मुक्ति,1,अस्थि विज्ञान,1,आई आई टी,1,आई साईबोर्ग,1,आईएनएस अरिहंत,1,आकाश,1,आकाशगंगा,2,आटिज्‍म,1,आध्यात्म,1,आनंद कुमार,1,आनुवांशिक वाहक,1,आयुष मित्तल,1,आर्कियोलॉजी,1,आलम आरा,1,आविष्कार,1,आविष्कार प्रौद्योगिकी मोबाईल,1,इंटरनेट का सफर,1,इंडिव्हिजुअल व्हेलॉसिटी,1,इनविजिबल मैन,1,इन्जाज़-ऊंट प्रतिकृति,1,इन्द्रधनुष,1,इन्द्रनील भट्टाचार्जी,1,इन्द्रनील भट्टाचार्य,1,इशारों की भाषा,1,ईश्वर और विज्ञान,1,उजाला मासिक,1,उन्माद,1,उन्‍मुक्‍त,1,उप‍लब्धि,3,उबुन्टू,1,उल्‍कापात,1,उल्‍कापिंड,1,ऋग्वेद,1,एड्स जांच दिवस,1,एड्सरोधी क्रीम,1,एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया,1,एल्कोहल,1,एल्फ्रेड नोबल,1,औरतों में दिल की बीमारी का खतरा,1,कदाचार,1,कपडे,1,कम्‍प्‍यूटर एवं तकनीक,4,कम्प्यूटर विज्ञान,1,करेंट साइंस,1,कर्मवाद,1,किसानों की आत्महत्याएँ,1,कीमती समय,1,कृत्रिम जीवन,1,कृत्रिम रक्‍त,1,कृषि अवशेष,1,केविन वार्विक्क,1,कैसे मजबूत बनाएं हड्डियां,1,क्रायोनिक्स,1,क्रैग वेंटर,1,क्षय मास,1,क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान कथा लेखन,2,खगोल,1,खगोल विज्ञान,2,खगोल विज्ञान.,1,खगोल वेधशाला,1,खतरनाक व्‍यवहार,1,खाद्य विषाक्‍तता,1,खारा जल,1,खूबसूरत आँखें,1,गणित,3,गति,1,गर्भकाल,1,गर्भस्‍थ शिशु का पोषण,1,गर्मी से बचने के तरीके,1,गुणसूत्र,1,गेलिलियो,1,गोल्डेन नंबर,2,गौरैया,1,ग्रह,1,ग्रीष्मकालीन अयनांत,1,ग्रुप व्हेलॉसिटी,1,ग्रेफ़ाइट,1,ग्लोबल वार्मिंग,2,घाघ-भड्डरी,1,चंद्रग्रहण,1,चमत्कार,1,चमत्कारिक पत्थर,1,चरघातांकी संख्याएं,1,चार्ल्‍स डार्विन,1,चिकत्सा विज्ञान,1,चैटिंग,1,छरहरी काया,1,छुद्रग्रह,1,जल ही जीवन है,1,जान जेम्स आडूबान,1,जानवरों की अभिव्यक्ति,1,जीवन और जंग,1,जीवन की उत्‍पत्ति,1,जैव विविधता वर्ष,1,जैव शवदाह,1,ज्योतिष,1,ज्योतिष और अंधविश्वास,2,झारखण्‍ड,1,टिंडल प्रभाव,1,टीलोमियर,1,टीवी और स्‍वास्‍थ्‍य,1,टीवी के दुष्‍प्रभाव,1,टेक्‍नालॉजी,1,टॉप 10 ब्लॉगर,1,डा0 अब्राहम टी कोवूर,1,डा0 ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम,1,डाइनामाइट,1,डाटा सेंटर,1,डिस्कस,1,डी•एन•ए• की खोज,3,डीप किसिंग,1,डॉ मनोज पटैरिया,1,डॉ. के.एन. पांडेय,1,डॉ० मिश्र,1,ड्रग एडिक्‍ट,1,ड्रग्स,1,ड्रग्‍स की लत,1,तम्बाकू,1,तम्‍बाकू के दुष्‍प्रभाव,1,तम्बाकू निषेध,1,तर्कशास्त्र,1,ताँत्रिक क्रियाएँ,1,थर्मोइलेक्ट्रिक जेनरेटर,1,थ्री ईडियट्स के फार्मूले,1,दर्दनाशी,1,दर्शन,1,दर्शन लाल बवेजा,3,दिल की बीमारी,1,दिव्‍य शक्ति,1,दुरबीन,1,दूरानुभूति,1,दोहरे मानदण्ड,1,धरोहर,1,धर्म,2,धातु विज्ञान,1,धार्मिक पाखण्ड,1,धुम्रपान और याद्दाश्‍त,1,धुम्रपान के दुष्‍प्रभाव,1,धूल-मिट्टी,1,नई खोजें,1,नन्हे आविष्कार,1,नमक,1,नवाचारी भौतिकी,1,नशीली दवाएं,1,नाइट शिफ्ट के दुष्‍प्रभाव,1,नारायणमूर्ति,1,नारी-मुक्ति,1,नींद और बीमारियां,1,नींद न आने के कारण,1,नेत्रदान और ब्लॉगर्स,1,नेत्रदान का महत्‍व,1,नेत्रदान कैसे करें?,1,नैनो टेक्नालॉजी,1,नॉटिलस,1,नोबल पुरस्कार,1,नोबेल पुरस्कार,2,न्‍यूटन,1,परमाणु पनडुब्‍बी,1,परासरण विधि,1,पर्यावरण और हम,1,पर्यावरण चेतना,2,पशु पक्षी व्यवहार,1,पहली बारिश,1,पाई दिवस,1,पुच्‍छल तारा,1,पुरुष -स्त्री लिंग अनुपात,1,पूर्ण अँधियारा चंद्रग्रहण,1,पृथ्वी की परिधि,3,पृथ्‍वेतर जीवन,1,पेट्रोल चोरी,1,पेंसिल,1,पैडल वाली पनडुब्बी,1,पैराशूट,1,पॉवर कट से राहत,1,पौरूष शक्ति,1,प्रकाश,2,प्रज्ञाएँ,1,प्रतिपदार्थ,1,प्रतिरक्षा,1,प्रदूषण,1,प्रदूषण और आम आदमी,1,प्ररेणा प्रसंग,1,प्रलय,2,प्रलय का दावा बेटुल्गुयेज,1,प्रसव पीड़ा,1,प्रेम में ।धोखा,1,प्रोटीन माया,1,प्लास्टिक कचरा,1,फाई दिवस,1,फिबोनाकी श्रेणी,1,फिबोनाची,1,फेसबुक,1,फ्रीवेयर,1,फ्रेंकेंस्टाइन,1,फ्रेंच किसिंग,1,बनारस,1,बायो-क्रेमेशन,1,बायोमैट्रिक पहचान तकनीकियाँ,2,बाल विज्ञान कथा,1,बालसुब्रमण्यम,6,बिग-बेंग सिद्धांत,1,बिजली,1,बिजली उत्‍पादन,1,बिजली कैसे बनती है?,1,बिजलीघर,1,बिली का विकल्‍प,1,बी0एम0डब्ल्यू0,1,बीरबल साहनी,1,बुलेटप्रूफ,1,बैल चालित पम्प,1,ब्रह्मण्‍ड,1,ब्रह्मा,1,ब्रह्माण्‍ड,1,ब्रह्माण्‍ड के रहस्‍य,1,ब्रह्मान्ड,1,ब्रेन म्‍यूजिक,1,ब्लॉग लेखन,1,ब्लॉग लेखन के द्वारा विज्ञान संचार,2,ब्लॉगिंग का महत्व,1,भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद,1,भारतीय विज्ञान कथा लेखक समिति,1,भारतीय वैज्ञानिक,2,भारतीय शोध,1,भूकंप के झटके,1,भूकम्‍प,1,भूगर्भिक हलचलें,1,मंगल,1,मधुमेह और खानपान,1,मनजीत सिंह बोपाराय,1,मनीष मोहन गोरे,1,मनीष वैद्य,1,मनु स्मृति,1,मनोरंजक गणित,1,महिला दिवस,1,माचू-पिचू,1,मानव शरीर,1,माया,1,मारिजुआना,1,मासिक धर्म,1,मिल्‍की वे,1,मिशन स्टारडस्ट-नेक्स,1,मीठी गपशप,1,मीमांसा,1,मुख कैंसर,1,मृत सागर,1,मेघ राज मित्र,1,मेडिकल रिसर्च,1,मेरी शैली,1,मैथेमेटिक्स ओलम्पियाड,1,मैरी क्‍यूरी,2,मैरीन इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज लि,1,मोटापा,1,मोबाईल के नुकसान,1,मौसम,1,यजुर्वेद,1,युवा अनुसंधानकर्ता पुरष्कार,1,यूरी गागरिन,1,योगेन्द्र पाल,1,योगेश,1,योगेश रे,1,रक्षा उपकरण,1,राईबोसोम,1,रूप गठन,1,रेडियो टोमोग्राफिक इमेजिंग,1,रैबीज,1,रोचक रोमांचक अंटार्कटिका,4,रोबोटिक्स,1,लखनऊ,1,लादेन,1,लालन-पालन,1,लिनक्स,1,लिपरेशी,1,लीप इयर,1,लेड,1,लॉ ऑफ ग्रेविटी,1,लोक विज्ञान,1,लौह स्तम्भ,1,वजन घटाने का आसान तरीका,1,वाई गुणसूत्र,1,वायु प्रदुषण,1,वाशो,1,विज्ञान,1,विज्ञान कथा,3,विज्ञान कथा सम्मेलन,1,विज्ञान के खेल,2,विज्ञान चुटकले,1,विज्ञान तथा प्रौद्यौगिकी,1,विज्ञान प्रगति,1,विज्ञान ब्लॉग,1,विज्ञापन,1,विटामिनों के वहम,1,विद्युत,1,विवेकानंद,1,विवेचना-व्याख्या,1,विश्व नि-तम्बाकू दिवस,1,विश्व पर्यावरण दिवस,1,विश्व भूगर्भ जल दिवस,1,विष्णु,1,वीडियो,1,वीडियो बुक,1,वैज्ञानिक दृष्टिकोण,1,वैद्य अश्विनी कुमार,1,वोस्तोक,1,व्‍यायाम के लाभ,1,व्हेलॉसिटी,1,शिव,1,शुक्र पारगमन,1,शुगर के दुष्‍प्रभाव,1,शून्य,1,शोध परिणाम,1,शोधन,1,श्रृष्टि का अंत,1,सं. राष्ट्रसंघ,1,सकारात्‍मक सोच का जादू,1,संक्रमण,1,संख्या,1,संजय ग्रोवर,1,संज्ञात्मक पक्षी विज्ञान,1,सटीक व्‍यायाम,1,संत बलबीर सिंह सीचेवाल,1,सत्यजित रे,1,समय की बरबादी को रोचकने के उपाय,1,समाज और हम,1,समुद्र,1,संयोग,1,सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस,1,सर्प संसार,1,साइकोलोजिस्ट,1,साइनस उपचार,1,साइंस ब्लागर्स मीट,1,साइंस ब्लागर्स मीट.,2,साइंस ब्लॉग कार्यशाला,2,साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन अवार्ड,1,साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन रजिस्ट्रेशन,1,साइंस ब्लॉगर्स ऑफ दि ईयर अवार्ड,1,साइंस ब्लोगिंग,1,साईकिल,1,सामवेद,1,सामाजिक अभिशाप,1,सामाजिक चेतना,1,साहित्यिक चोरी,2,सिगरेट छोड़ें,1,सी. एस. आई. आर.,1,सी.वी.रमण विज्ञान क्लब,1,सीजेरियन ऑपरेशन,1,सुपर अर्थ,1,सुपर कम्प्यूटर,1,सुरक्षित ब्लॉगिंग,1,सूर्यग्रहण,2,सृष्टि व जीवन,3,सेक्स रेशियो,1,सेहत की देखभाल,1,सोशल नेटवर्किंग,1,स्टीफेन हाकिंग,1,स्पेन,1,स्मृति,1,स्वर्ण अनुपात,1,स्वाईन-फ्लू,1,स्वास्थ्य,2,स्‍वास्‍थ्‍य और खानपान,1,स्वास्थ्य चेतना,3,हमारे वैज्ञानिक,4,हरित क्रांति,1,हंसी के फायदे,1,हाथरस कार्यशाला,1,हिंद महासागर,1,हृदय रोग,1,होलिका दहन,1,ह्यूमन रोबोट,1,
ltr
item
Science Bloggers' Association: सन 2070 में लिखा गया एक पत्र, मानवता के नाम! Water is life!!! -सलीम ख़ान
सन 2070 में लिखा गया एक पत्र, मानवता के नाम! Water is life!!! -सलीम ख़ान
http://1.bp.blogspot.com/_6o72S7QXz3Y/SyoPC0CB1PI/AAAAAAAABT8/r3BnOXRKD2w/s200/saleem.jpg
http://1.bp.blogspot.com/_6o72S7QXz3Y/SyoPC0CB1PI/AAAAAAAABT8/r3BnOXRKD2w/s72-c/saleem.jpg
Science Bloggers' Association
https://blog.scientificworld.in/2009/12/2070-water-is-life.html
https://blog.scientificworld.in/
https://blog.scientificworld.in/
https://blog.scientificworld.in/2009/12/2070-water-is-life.html
true
1415300117766154701
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy