शीघ्र ही मिल जायेगी मृत्यु पर विजय.

जिन लोगों ने मेरी शैली कृत विज्ञान कथा “फ्रेंकेंस्टाइन” (Frankenstein) पढ़ी होगी, उन्हें उस विश्व की पहली विज्ञान कथा का ताना-बाना अवश्य...


जिन लोगों ने मेरी शैली कृत विज्ञान कथा “फ्रेंकेंस्टाइन” (Frankenstein) पढ़ी होगी, उन्हें उस विश्व की पहली विज्ञान कथा का ताना-बाना अवश्य याद होगा, जिसमें जेनेवा में चिकिस्ता विज्ञान का अध्ययन कर रहा डाक्टर फ्रेंकेंस्टाइन अपने प्राणों से एक शव को पुनर्जीवित कर देता है।

मेरी शैली की उस संकल्पना को यथार्थ रूप में परिणत करने के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है। उस उम्मीद की किरण का नाम है “क्रायोनिक्स तकनीक” (Cryonics Technique)। एल्कर फाउंडेशन विश्व का पहला केन्द्र है, जो क्रायोजनिक तकनीक के जरिए नए नए फ्रेंकेंस्टाइन तैयार करने के लिए मृत देहों को सहेज रहा है।

क्रोयोनिक्स तकनीक को समझने से पहले मौत की शरीरिक रासायनिक प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। हमारा पूरा शरीर कोशिकाओं से मिलकर बना है। कोशिकाओं को रक्त से पोषण मिलता है। प्रत्येक कोशिका एक बैटरी की तरह है, जिसमें निश्चित मात्रा में ऊर्जा संग्रहीत होती है। अगर रक्त से कोशिकाओं को पोषक तत्व की आपूर्ति रूक जाए, तो कुछ समय बाद रासायनिक क्रियाओं के फलस्वरूप हमारी कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। इसी वजह से ही व्यक्ति की मौत हो जाती है। 

पोषण बंद होने के बाद कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के बीच का यह समय बहुत अल्प अवधि का होता है, जिसे ग्रेस पीरियड कहते हैं। इस दौरान यदि डाक्टर “कार्डियो पलमोनरी रिससरिटेशन” (Cardio Pulmonary Resuscitation) सी0पी0आर0 उपलबध करा दें, तो कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। सी0पी0आर0 के तहत फेफड़ों में आक्सीजन प्रवेश कराकर पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को सुचारू किया जाता है। इससे कोशिकाओं तक आक्सीजन के रूप में पोषण पहुंच जाता है और कोशिकाओं के ठप पावर हाउस फिर से ऊर्जा का उत्पादन शुरू कर देते हैं और वे नष्ट होने से बच जाती हैं।

इस सम्पूर्ण प्रक्रिया का विस्तृत स्वरूप ही क्रायोनिक्स के नाम से जाना जाता है। इसमें शरीर का तापमान स्थिर रखा जाता है। कम तापमान पर ग्रेस पीरियड की अवधि बढ़ जाती है क्योंकि जहरीली रासायनिक क्रियाओं की गति मंद हो जाती है। भले ही व्यक्ति की धड़कनें बंद हो गयी हों या वह सांस नहीं ले रहा हो। लेकिन इस तकनीक में उसके शरीर को तरह नाइट्रोजन के जार में माइनस 370 डिग्री फॉरेनहाइट के अत्यंत निम्न तापमान पर रखा जाता है। सारा ध्यान मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाने पर दिया जाता है।

व्यक्ति की चिकित्सकीय मापदण्डों के अनुसार मृत्यु होते ही उसके शरीर में दवा और पोषक तत्व इंजेक्शन के द्वारा प्रविष्ट करा दिये जाते हैं और उनके जमने की प्रक़िया शुरू हो जाती है। एक विशेष रक्षात्मक द्रव पूरे शरीर में डाल दिया जाता है और मृत शरीर को एक बड़े टैंक “डिवार” में बंद कर दिया जाता है। डिवार में द्रव नाइट्रोजन भरी होती है। इस तरह से मूल शरीर को सुरक्षित करने वाली तकनीक क्रायोनिक्स सम्पन्न होती है और इसके साथ ही पुनर्जीवित होने का एक चरण समाप्त होता है।

दूसरा चरण नैनो टेक्नालॉजी कहलाता है। इस तकनीक के द्वारा भविष्य में जब चहों तब मृत शरीर को जीवित किया जा सकता है। इसमें “माइक्रोमिनीएच्यूराज्ड मशीन” को रूधिर वाहिनियों में इंजेक्शन के जरिए प्रवेश करा दिया जाता है। अत्यंत सूक्ष्म आकार के ये रोबोट कोशिकाओं तक जा पहुंचते हैं। वहां ये रोबोट कम तापमान, बीमारी या बुढ़ापे के कारण क्षतिग्रस्त हुई कोशिका की मरम्मत करके उसे स्वस्थ अवस्था में ले जाते हैं। अभी यह तकनीक परीक्षण के स्तर पर ही है और वैज्ञानिक इस दिशा में दिन-रात अनुसंधानरत हैं। वैज्ञानिकों को विश्वास है कि इस तकनीक के जरिए मृत व्यक्ति बिलकुल भला-चंगा, पूरी तरह से स्वस्थ अवस्था में जीवित किया जा सकेगा। इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों को विश्वास है कि वे इस प्रौद्योगिकी के द्वारा अगली सदी तक मौत पर विजय प्राप्त कर लेंगे।
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COMMENTS

BLOGGER: 63
  1. एक ज्ञानवर्धक जानकारी.........बहुत बहुत आभार

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  2. अच्छी जानकारी.. हैपी ब्लॉगिंग

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  3. मूलतः यह लेख अपाका लिखा हैं काव्या जी या फिर संदीप निगम का -कृपया बताएं ! लेख अच्छा है -क्रायोजेनिक कैप्सूलों में बंद रोगी की अवस्था मृत प्राय होती है -सस्पेंडेड animation kahlaatee है !

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  4. काव्या जी यह एक महत्वपूर्ण लेख है इस मायने में भी कि इस बात को यदि सभी ठीक तरह से समझ् जाते हैं कि हमारा शरीर कोशिकाओं से बना है और कोशिकायें धीरे धीरे मरती जाती है तो मृत्युभय समाप्त हो सकता है और आत्मा पुनर्जन्म जैसे अन्धविश्वास भी समाप्त हो सकते है । क्लिनिकल डेथ अर्थात मस्तिष्क की कोशिकायें मर जाने के बाद भी यदि नैनो इस मे कमयाब रहती है तो यह विज्ञान की एक बड़ी सफलता होगी । -शरद कोकास

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  5. बढ़िया और ज्ञानवर्धक जानकारी दी आपने

    आपको धन्यवाद

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  6. @"क्लिनिकल डेथ अर्थात मस्तिष्क की कोशिकायें मर जाने "
    its biological death not only clinical KOKAS JI !

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  7. अरे..........!
    ये तो बिल्कुल नई जानकारी दी है आपने।
    बधाई!

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  8. ज्ञानवर्धक जानकारी.........बहुत बहुत आभार

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  9. जानकारी बहुत बढ़िया है काव्या जी।
    एक प्रश्‍न मन में अक्सर उठता रहता है कि अगर विज्ञान वास्तव में मृत्यु पर विजय पा लेगा तो क्या ये प्रकृति/कुदरत के नियमों की अवेहलना नहीं होगी?

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  10. Nishchit roop se gyaan vardhan jaankari hai.....par kya ye prakriti ke niymo se chedcaad nahi...... aur prashn ye bhi hai ki kya dobara insaan normal life jee payega..........Vaigyanik uplabdhi ke liye badhai aapko aur ham sabko

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  11. बढ़िया जानकारी! आभार.

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  12. नयी जानकारी मिली, पर क्या मृत्यु पर विजय भयावह नहीं ?

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  13. मुझे ये नहीं समझ में आया, कि ये प्रकृति के नियमों की अवहेलना कैसे होगी?
    वैसे अगर ऐसे हो गया, तो जनसंख्या का क्या होगा?

    भारत जैसे देश तो वैसे ही बहुत रफ्तार से बढ रहे हैं

    और आपने कहा, आपकी शैली, और पारिणित का

    इसे अंग्रेज़ी में बतायेंगे। ये वाक्य पूरी तरह से समझ नहीं पाया, शुद्ध हिन्दी के कारण

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  14. jo cheez bhagwan ne apne bus me rakhi thi insan use bhi apne hath me le raha hai...interesting post...

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  16. उम्मीद नहीं थी कि साइंस के ब्लॉग में भी भ्रान्ति फैलाई जायेगी . विज्ञानं ने प्रयोग कर के देख लिया है क्लोनिंग का नया जीव नवजात नहीं होता बल्कि उस उम्र का होता है जिस उम्र में कोशिकाएं ली जाती हैं .

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  18. ashcharyjanak !lekin lagta nahin ki aisa kabhi sambhav hoga.

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  19. वाह क्या बात है!

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  20. बहुत बडिया जानकारी है लेकिन इस से उतपन होने वाली समस्याओं पर भी गौर करना होगा । आपने आज मन मे एक नौएए कहानी को जन दे दिया आभार्

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  21. खबर बासी है लेकिन "शीघ्र ही मिल जाएगी मृत्यु पर विजय" जैसे सनसनीखेज शीर्षक की क्या जरूरत थी?
    कुछ साल पहले इस पर डिस्कवरी चैनल पे कार्यक्रम आया था. यह उतना आसान नही है जितना आपने लिखा है.

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  22. उतना आसान भले ही न हो
    मगर जो आज तक ना मुमकिन समझा जाता था
    कम से कम वो मुमकिन की सीमा में तो आया
    धीरे धीरे आसान भी हो जायेगा

    अब यूं ही सोचिये,
    कि कभी यह सोचा जाता था कि हवा से भारी वस्तू का उड़ना ना मुमकिन होगा, पर आज हवाई जहाज़ उड़ते हम देखते हैं,

    आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है

    Need is the mother of invention.

    http://tanhaaiyan.blogspot.com

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  24. मेरी शैली की उस संकल्पना को यथार्थ रूप में परिणत करने के लिए जमीन उपलब्ध हो गयी है

    काव्या जी, मैं ऊपर दी गई लाइन का मतलब नहीं समझ पाया था

    शैली और परिणत का क्या अर्थ होता है?

    वैसे थोड़े दिन पहले आज तक पर एक प्रोग्राम आ रहा था, कि हमारे वैज्ञानिकों ने कुछ सिग्नल एक particular ग्रह की तरफ भेजे हैं, जिनको 20 साल लगेंगें उन तक पहुंचने में (यहां बात दूसरी दुनिया की हो रही है) और अगर वो हमारे सिग्नल समझ सके और उन्होंने उसका जवाब दिया तो हमे वो जवाब 2049 तक मिलेगा।

    बहुत से सवाल उठे मेरे मन में लेकिन पता नहीं था किस से पूछूँ। सोचा यहां डाल देता हूँ। जानता हूँ के ये सवाल relevant नहीं हैं। उम्मीद करता हूँ इस पर कभी कोई पोस्ट लिखेगा

    मेरा सवाल
    1) क्या वो हमारे सिग्नल समझ पायेंगे?
    2) अगर कोई दूसरी दुनिया है भी, तो क्या सारे अंतरिक्ष में एक ही standard follow होता होगा, सिग्नल send और recieve करने के लिये?
    3) अगर कोई दूसरी दुनिया है भी, तो क्या कभी उन से communication सम्भव हो पायेगा? अगर हां, तो what will be the medium/language of communication?

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  25. काव्या जी
    क्लोनिंग के परिणाम तो आपको मालूम होंगे . क्लोन किये गए जीव का बहुत जल्द बुढापा आ जाता है. क्योंकि जिन सेल का उपयोग किया जाता है उनपर उम्र का प्रभाव नहीं हटाया जा सकता .
    अगर मान लीजिये विज्ञानं ने खोज भी कर ली व्यक्ति नहीं मरेगा, लेकिन शारीरिक क्षय और बीमारी को जब तक जड़ से नहीं उन्मूलित किया जा सकता, ऐसा कोई प्रयोग व्यर्थ है . भारतीय योगियों में ये क्षमता जरूर रही है कि वे शारीरिक क्षय को रोक सकें वह भी बिना किसी मशीन के

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  26. वैसे मैने कभी एक जगह एक लाइन पढ़ी थी

    जो ये पोस्ट पढ़ने पर याद आ गयी, इस लिये आप सब से share करना चाहता हूँ

    Nothing is impossible, its only that no body has done that till now.
    --Unknown.

    असम्भव कुछ भी नहीं, बात सिर्फ़ इतनी सी है कि आज तक उसे कोई कर नहीं पाया
    --अज्ञात

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  27. डा० सिन्हा जी, आपका कथन है "क्लोनिंग के परिणाम तो आपको मालूम होंगे. क्लोन किये गए जीव का बहुत जल्द बुढापा आ जाता है. क्योंकि जिन सेल का उपयोग किया जाता है उनपर उम्र का प्रभाव नहीं हटाया जा सकता."

    सिन्हा जी, आपकी बात में पूर्वाग्रह की हल्की सी झलक है। क्योंकि विज्ञान के क्षेत्र में कुछ भी असंभव नहीं होता। हाँ, जब कोई भी प्रयोग शुरू होता है, तो लोग इसी तरह की बातें करते हैं। लेकिन प्रयोग सफल हो जाने के बाद वे चुप हो जाते है। धरती पर वैज्ञानिकों ने आज तक जो भी हजारों लाखों प्रयोग किए हैं, उन सभी प्रयोगों के पहले इसी तरह की बातें कही गयी थीं। इसलिए इस तरह की बात कहना आप जैसे व्यक्ति के लिए उचित प्रतीत नहीं होता।

    आपने यह भी लिखा है- "भारतीय योगियों में ये क्षमता जरूर रही है कि वे शारीरिक क्षय को रोक सकें वह भी बिना किसी मशीन के।"

    क्षमा चाहूंगी इस तरह की अनगिनत गप्प कथाएं हमारे समाज में प्रचलित हैं। मैं आपसे पूछती हूं कि क्या आपने देखा है कि किसी 500 वर्ष के व्यक्ति को? फिर इस तरह की बातों का क्या मतलब है? हाँ, यदि आप के पास इस तरह का कोई प्रमाण हो, तो अवश्य बताएं, हमें जानकर प्रसन्नता होगी।

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  28. क्लोनिंग से जो भेड़ बनाई गयी थी उसका क्या हुआ सर्व ज्ञात है .
    अपने देश की स्वर्णिम युग को आप नकारना चाहती हैं ! उत्तराखंड में बद्रीनाथ के पास नारायण पर्वत है जहाँ तक पहुचना आम लोगो के लिए संभव नहीं है . उस पर्वत पर करीब ११ लोग तपस्या कर रहे हैं . अगर किसी BSF वाले से आपका संपर्क है तो ज्यादा जानकारी मिल सकती है .
    मैं भी एक विज्ञानं का विद्यार्थी हूँ . विज्ञानं में भी भेद है एक exact और दूसरा inexact का ? चिकित्सा विज्ञानं inexact की श्रेणी में आता है जहाँ मापदंड बदलते रहते हैं क्योंकि कोई भी दो व्यक्ति एक जैसे नहीं होते .
    वैसे भी अगर कोई तकनीक विकसित हो भी जाती है तो यह किसको उपलब्ध होगी और उसका क्या दुरूपयोग हो सकता है , कल्पना ही की जा सकती है .
    टिप्पणियों को उनके सन्दर्भ में लें व्यक्तिगत रूप में नहीं .

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  30. अर्शिया जी
    मैं विज्ञानं को नकार नहीं रहा हूँ. उसके खतरों की ओर भी ध्यान आकृष्ट कर रहा हूँ .
    पिछले महीने ही आपके ही ब्लॉग में वेद और चिकित्सक के सन्दर्भ में पोस्ट प्रस्तुत की गयी है

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  31. आदरणीय सिन्हा जी, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करती हूं। खतरे तो हर जगह होते हैं, जीवन में हैं, तो विज्ञान में भी होंगे। विज्ञान हमें नई नई सम्भावनाओं की राह दिखाता है। हमें विज्ञान को इसी संदर्भ में लेना चाहिए।
    यह असोसिएशन ज्ञान का सम्मान करता है और परिकल्पनाओं को प्रोत्साहित करता है। आपने इस पोस्ट से सम्बंधित खतरों के प्रति आगाह कराया, इसके लिए आभार।
    आशा है इसके प्रोत्साहन में आपका स्नेह पूर्व की भांति मिलता रहेगा।

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  32. @अर्शिया जी,आपका कहना है कि"हमारे पास उन तथाकथित योगियों, तथाकथित प्राचीन ज्ञान/उपलब्धि का ना तो एक भी प्रमाण है और न ही उदाहरण, फिरभी हम उसके नाम पर विज्ञान को नकारते रहते हैं।"

    अगर इस देश के तथाकथितयोगियों,चिन्तकों,ऋषि-मुनियों,महर्षियों ने शायद इस बात की कल्पना नहीं की होगी कि उनके तथाकथितहोनहार विग्यानबुद्धि वंशज उनके होने का ही प्रमाण माँगने लगेंगे। यदि उन्होने ऎसा सोचा होता तो शायद आप लोगों की संतुष्टि के लिए अपना कोई जन्म/मृ्त्यु प्रमाणपत्र ही छोड जाते।

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  34. पंडित जी, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहती हूं कि यदि मैं एक किताब में यह लिख दूं कि मेरे दादाजी 1000 वर्ष तक जिए, वे आसमान में उडते थे और पानी के अंदर रहते थे, तो क्या आप इसे मान लेंगे?

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  35. अर्शिया जी, हमारी ये वर्तमान सभ्यता कभी तो समाप्त होगी ही और उसके बाद जब नया युग प्रारंभ होगा तो क्या आप ये उम्मीद करती हैं कि उस समय के लोग आपकी इन बातों पर यकीन कर सकेंगे कि कभी इन्सान चाँद पर भी गया था या कि वो सुदूर अन्तरिक्ष की सैर कर चुका था!!
    बिल्कुल यही बात आज के युग और उस प्राचीन युग के परिपेक्ष्य में भी लागू होती है....आज हम लोग बेशक शास्त्रों में लिखी बातों को कपोल कल्पना या गल्प मानते रहें....लेकिन क्या यह संभव नहीं है कि वास्तव में उस युग में मानव इतनी उन्नति कर चुका था।।

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  40. KOI BURAAI NAHI AI AGAR AISA HO JAAYE ...... SCIENCE, MANUSHY DIMAAG KI UTPATTI AI AUR NIRANTAR PRAGATI KUCH BHI KAR SAKTI HAI .........
    JAANKAARI ROCHAK AI ........ MAN KALPANAON MEIN UDNE LAGTA AI .......

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  42. Bahut sunder gyanwardhak lekh. cryogenics aur nanotechnology ke jariye kitana kuch kiya ja sakta hai. Aapka abhar.

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  43. I also feel it strongly that Kavyaa must reply to Swapnil which shall help him to come out of predicament -but you could write in Hindi as many people may not appreciate our escapades in a foreign language !

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  44. वास्‍तव में यह बहुत खुशी की बात है कि विज्ञान तरक्‍की कर रहा है .. पर उससे होनेवाले फायदे और नुकसान की कल्‍पना पहले कर कर लेना अच्‍छा होता है .. वैसे प्रकृति स्‍वयं ही हर जगह संतुलन बना लेती है .. पर जिस समय एलोपैथी चिकित्‍सा के फलस्‍वरूप मृत्‍युदर में कमी आ रही थी .. उसी समय परिवार नियोजन के उपायों के बारे में सोंच लेना उचित था .. आज लोगों के सम्‍मुख इतनी बडी जनसंख्‍या की जरूरतों को पूरा कर पाने की भागमभाग न होती .. साथ ही प्रकृति का अंधाधुंध दोहन भी नहीं होता .. आज घर घर में जितने वैज्ञानिक उपकरण प्रयोग में लाए जा रहे हैं .. उनका क्‍या नुकसान हो रहा है .; यह किसी से छुपा नहीं !!

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  45. ये अंग्रेजी में क्यों झगडने लगे, क्या हिन्दी में झगडा बुरा लगता है?
    ----वास्तव में पुराना समाचार है,यह प्रयोग कई दशकों से चल रहा है । संगीता पुरी ने जो कहा वह उचित ही कहा है, ध्यान देना पडेगा।
    ---कोसिसें तो होती ही रहनी चाहिये--"हार्ट विदिन एन्ड गौड ओवर हेड"

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  46. कल्पना कीजिये मृत्यु पर विजय प्राप्त करनें के कारण विश्व के सभी मनुष्य अमर हो जाय और पृथ्वी की जनसंख्या यूँ हीं बढती जाय तो फिर क्या होगा……………………………

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  49. चूंकि ये साइंस ब्लोगेर्स की असोसिएशन है. तो क्या ये बेहतर नहीं होगा की यहाँ सिर्फ साइंस की बातें की जाएँ?

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  53. इस बात से सहमत हुआ जा सकता है कि संभव है कि यह सभ्यता खत्म हो जाये और भविष्य में जो नई सभ्यता बने उसमें मानव की औसत आयु २० वर्ष ही हो तब ऐसे में उस समय के मानव के लिये यह मान पाना मुश्किल होगा कि कभी मानव की आयु 50-60 या 80 की उम्र के लोग भी पृथ्वी पर हुआ करते होंगे।

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  54. Swapnil said...
    @सागर नाहर ज़ी, प्रशन यह् है कि यह् तय कौन् करेगा कि प्रक्रति के नियम् क्या है? हम ही‌ तो तय करते है कि क्या हैं प्रक्रति के नियम्?

    आपकी यह बात कुछ जमी नहीं, शायद आप मेरा प्रश्‍न सही समझ नहीं पाये, या मैं आपको सही समझा नहीं पाया।
    प्रकृति के नियम हम तय नहीं करते ना ही कर सकते हैं, उल्टा प्रकृति हमारे लिये नियम तय करती है जिन्हें हम अपनाना नहीं चाहते हैं और जीवन दुखी: होते रहते हैं।

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  59. ज्ञानवर्धक और रोचक जानकारी. बधाई.

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  60. http://hindi.webdunia.com/news-international/21-%E0%A4%98%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%89%E0%A4%A0-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%BE-1110726026_1.htm

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  61. Ye bilkul satya hai...wo din dur nahi jab insaan mrityu pe vijay prapt kar sakega ...sirf thoughts positive hona chahiye..jis din saare insaano ke thoughts positive ho jayenge.kuchh bhi impossible nahi hoga

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Name

- दर्शन लाल बावेजा,1,- बी एस पाबला,1,-Dr. Prashant Arya,2,-अंकित,4,-अंकुर गुप्ता,7,-अभिषेक ओझा,2,-अल्पना वर्मा,22,-आशीष श्रीवास्‍तव,2,-इन्द्रनील भट्टाचार्जी,3,-काव्या शुक्ला,2,-जाकिर अली ‘रजनीश’,56,-जी.के. अवधिया,6,-जीशान हैदर जैदी,45,-डा प्रवीण चोपड़ा,4,-डा0 अरविंद मिश्र,26,-डा0 श्‍याम गुप्‍ता,5,-डॉ. गुरू दयाल प्रदीप,8,-डॉ0 दिनेश मिश्र,5,-दर्शन बवेजा,1,-दर्शन लाल बवेजा,7,-दर्शन लाल बावेजा,2,-दिनेशराय द्विवेदी,1,-पवन मिश्रा,1,-पूनम मिश्रा,7,-बालसुब्रमण्यम,2,-योगेन्द्र पाल,6,-योगेश,1,-रंजना [रंजू भाटिया],22,-रेखा श्रीवास्‍तव,1,-लवली कुमारी,3,-विनय प्रजापति,2,-वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई),81,-शिरीष खरे,2,-शैलेश भारतवासी,1,-संदीप,2,-सलीम ख़ान,13,-हिमांशु पाण्डेय,3,.संस्‍था के उद्देश्‍य,1,।NASA,1,(गंगा दशहरा),1,100 billion planets,1,2011 एम डी,1,22 जुलाई,1,22/7,1,3/14,1,3D FANTASY GAME SPARX,1,3D News Paper,2,5 जून,1,Acid rain,1,Adhik maas,1,Adolescent,1,Aids Bumb,1,aids killing cream,1,Albert von Szent-Györgyi de Nagyrápolt,1,Alfred Nobel,1,aliens,1,All india raduio,1,altruism,1,AM,18,Aml Versha,1,andhvishwas,5,animal behaviour,1,animals,1,Antarctic Bottom Water,1,Antarctica,9,anti aids cream,1,Antibiotic resistance,1,arunachal pradesh,1,astrological challenge,1,astrology,1,Astrology and Blind Faith,1,astrology and science,1,astrology challenge,1,astronomy,4,Aubrey Holes,1,Award,4,AWI,1,Ayush Kumar Mittal,2,bad effects of mobile,1,beat Cancer,1,Beauty in Mathematics,1,Benefit of Mother Milk,1,benifit of yoga,1,Bhaddari,1,Bhoot Pret,3,big bang theory,1,Binge Drinking,1,Bio Cremation,1,bionic eye Veerubhai,1,Blind Faith,4,Blind Faith and Learned person,1,bloggers achievements,1,Blood donation,1,bloom box energy generator,1,Bobs Award,1,Breath of mud,1,briny water,1,Bullock Power,1,Business Continuity,1,C Programming Language,1,calendar,1,Camel reproduction centre,1,Carbon Sink,1,Cause of Acne,1,Change Lifestyle,1,childhood and TV,1,chromosome,1,Cognitive Scinece,1,comets,1,Computer,2,darshan baweja,1,Deep Ocean Currents,1,Depression Treatment,1,desert process,1,Dineshrai Dwivedi,1,DISQUS,1,DNA,3,DNA Fingerprinting,1,Dr Shivedra Shukla,1,Dr. Abdul Kalam,1,Dr. K. N. 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