ये साहस के पुतले ब्लॉगर, इनको मेरा प्रणाम।

बड़ी-बड़ी बातें करना और बात है और कुछ कर दिखाना दूसरी बात। जी हाँ, आपने लम्बी-लम्बी बातें छोड़ने वाले बहुत से लोग देखे होंगे, लेकिन बहुत से ...

बड़ी-बड़ी बातें करना और बात है और कुछ कर दिखाना दूसरी बात। जी हाँ, आपने लम्बी-लम्बी बातें छोड़ने वाले बहुत से लोग देखे होंगे, लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं, जो चुपचाप अपना काम करते हैं। शायद यही कारण है कि जब मुझे ऐसे ब्लॉगर्स के बारे में पता चला जिन्होंने सचमुच एक बड़ा संकल्प लिया है, तो मुझे बहुत खुशी हुई और मैंने सोचा कि ऐसे लोगों के साहस को सामने लाया जाए, ताकि वे अन्य लोगों के लिए प्रेरणा के श्रोत बन सकें।

मैं बात कर रहा हूँ 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' पर ही प्रकाशित पिछली पोस्ट 'दुनिया की सबसे खूबसूरत आँखें' की, जिसपर आई टिप्पणियों से पता चला कि हमारे ब्लॉग जगत में भी ऐसे लोग हैं, जिन्हों नेत्रदान जैसे संकल्प को ले रखा है। ये साहसी ब्लॉगर हैं सर्वश्री उन्मुक्त, श्रीमती निर्मला कपिला, सुश्री अंशुमाला, श्री दर्शन बवेजा। और इन्हीं में एक नाम शामिल हुआ है सलीम खान का, जिन्होंने पिछली पोस्ट को पढ़ने के बाद ही नेत्रदान का संकल्प लिया है।

उन्मुक्त जी सच्चे अर्थों में एक समाज सेवी हैं, जो अपना नाम और पहचान गुप्त रखकर अंतर्जाल पर साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्होंने नेत्र दान के साथ ही देहदान का भी फैसला ले रखा है। उन्मुक्त जी के शब्दों में- 'इस समय तो नहीं पर मेरे इस दुनिया से जाने के बाद, न केवल मेरी आंखें, पर शरीर के सारे अंग दुनिया के अच्छे अंगो में गिने जायेंगे, क्योंकि न केवल मैंने आंखे दान कर रखी हैं पर शरीर के सारे अंग भी।' उन्मुक्त जी 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' द्वारा 'साइंस ब्लॉगर्स ऑफ द ईयर-2009' एवं 'संवाद समूह' द्वारा कहानी श्रेणी के अन्तर्गत 'संवाद सम्मान-2009' सम्मान से विभूषित हैं।

My Photoनिर्मला जी, एक विनम्र और समाज सेवा के भाव वाली विदुषी महिला हैं। उन्होंने भी घोषणा की है कि वे नेत्रदान के साथ देहदान के बारे में भी गम्भीरता से सोच रही हैं। समूचे ब्लॉगजगत को निर्मला जी और उन्मुक्त जैसे परमार्थमुखी ब्लॉगर्स पर गर्व है। निर्मला जी 'संवाद समूह' द्वारा कहानी श्रेणी के अन्तर्गत 'संवाद सम्मान-2009' से सम्मानित हैं।

My Photo दर्शन बवेजा जी यूँ तो एक विज्ञान के अध्यापक हैं और विज्ञान के तरह-तरह के मॉडल्स बनाकर बच्चों में विज्ञान के प्रति रूचि जगाने का कार्य करते हैं। इसके अतिरिक्त दर्शन जी एक कुशल विज्ञान संचारक भी हैं और समाज में फैले अंधविश्वास को मिटाने के लिए सामाजिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। दर्शन जी ने 23 वर्ष पूर्व ही नेत्रदान का संकल्प लिया था।


अंशु माला जी एक व्यवहारिक ब्लॉगर हैं, जो स्वयं को आम आदमी मानती हैं और आम आदमी के भीतर पसरी हुई बुराईयों को दूर करने के उद्देश्य से 'मैंगो पीपल' ब्लॉग का संचालन करती हैं। माला जी ने भी अपने नेत्रदान का संकल्प लिया है।

My Photo
सलीम खान एक युवा ब्लॉगर हैं, जिन्होंने हाल ही में विज्ञान लेखन की ओर कदम रखा है। वे 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' के एक सक्रिय सदस्य हैं। उन्होंने पिछली पोस्ट को पढ़कर नेत्रदान के संकल्प का साहस दिखाया है। सलीम खान 'संवाद समूह' द्वारा नवोदित ब्लॉगर श्रेणी के अन्तर्गत 'संवाद सम्मान-2009' से सम्मानित हैं।


'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' परिवार इन सभी साहसी ब्लॉगर्स को बधाई देता है और यह निवेदन करता है कि  कृपया ये अपने उन विचारों को हम तक अवश्य पहुँचाएं कि किन क्षणों में किस घटनाक्रम से प्रभावित होकर आप सबने 'न्रत्रदान' का संकल्प लिया और इसके लिए किस अस्पताल/संस्था से संपर्क किया। कृपया संभव हो तो उस अस्पताल/संस्था का संपर्क सूत्र भी प्रदान करें। आप सबके विचार हमारे लिए ही नहीं सम्पूर्ण ब्लॉग जगत के लिए प्ररेणा के श्रोत होंगे।
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My Photoपु:नश्चच- पोस्ट प्रकाशित होने के बाद कुछ और ब्लॉगर्स के बारे में भी ज्ञात हुआ है, जिन्होंने इस पवित्र संकल्प को लिया है। उनमें से एक नाम अदा जी का है। उनका इस बारे में कथन है- 'मैंने भी अपने नेत्र दान आज से दस साल पहले ही कर दिया था...और ३ साल पहले देह दान....हृदय दान...यहाँ, कनाडा के हार्ट इंस्टिट्यूट को कर चुकी हूँ..तकरीबन पाँच साल पहले...आशा है...यह शरीर मरणोपरांत मेडिकल के विद्यार्थियों के काम आएगा...'

My Photoइसी क्रम में दूसरा नाम इंदु पुरी गोस्वामी जी का है। हरकीरत जी की सूचना के अनुसार उन्होंने भी देहदान का पवित्र लक्ष्य लया है। साथ ही सुरेश चिपलूनकर जी ने भी सूचित किया है कि उन्होंने 8 साल पहले नेत्रदान का संकल्प लिया था। उनका कथन है- 'नेत्रदान का फ़ॉर्म तो 8 साल पहले ही भर दिया था, लेकिन नेत्रदान हो पाये या न हो पाये कहना मुश्किल है (उस समय क्या परिस्थिति बने कौन जाने)। :)' आप सभी को 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

अगर आपको 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

COMMENTS

BLOGGER: 38
  1. सचमुच इन लोगों ने साहस का काम किया है, हम लोग तो सिर्फ सोच कर ही रह जाते हैं। आप सभी भद्र जनों को बधाई।

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  2. सभी भद्र जनों को अनेकों अनेक बधाइयाँ...
    मैंने भी अपने नेत्र दान आज से दस साल पहले ही कर दिया था...और ३ साल पहले देह दान....
    हृदय दान...यहाँ, कनाडा के हार्ट इंस्टिट्यूट को कर चुकी हूँ..तकरीबन पाँच साल पहले...
    आशा है...यह शरीर मरणोपरांत मेडिकल के विद्यार्थियों के काम आएगा...
    धन्यवाद..!!

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  3. जीते जीते रक्तदान,
    मरणोपरांत नेत्रदान,
    हो सके तो देहदान

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  4. निर्मला जी ,अन्जुमाला और दर्शन बवेजा जी आप सब पर हमें गर्व है ......रब्ब आपको जन्नत नसीब करे .....रजनीश जी इनमें एक नाम और जोडें जिन्होंने देह दान का निश्चय किया है ...वे हैं इंदु पूरी गोस्वामी ...जो अधिकतर buzz पे दिखाई देती हैं ....मैंने मनु जी के ब्लॉग पे एक बार उनका कमेन्ट पढ़ा था जिसमें उनहोंने इस बात का ज़िक्र किया था ......!!

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  5. मैं भी इस नेक कार्य ( नेत्रदान )को करने का संकल्प लेता हूँ

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  6. इन सभी साहसी बंधुओं को नमन.

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  7. हमें इन सबों का अनुकरण करना चाहिए .. इनपर हिंदी ब्‍लॉग जगत को नाज है .. मन में संकल्‍प के बावजूद मैं अभी तक पीछे ही हूं !!

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  8. जाकिर जी, मेरे बारे में अच्छे विचार रखने के लिये शुक्रिया।

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  9. सभी आदरणीय जनों को इस अमूल्य संकल्प के लिए दिल से बधाईयाँ
    regards

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  10. इन सभी के लिए आदर भाव !

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  11. सभी प्रणम्य हैं मगर इनकी सार्वजनिक उद्घोषणा केवल इसी अर्थ में उचित है कि यह लोगों को प्रेरित कर सकती है .मैं तो खैर अपने किसी अंग को इस योग्य ही नहीं समझता ...लेकिन पता नहीं डाक्टर क्या सोचेगें ? यह पोस्ट तभी पूर्ण होती जब यहाँ आप द्वारा या उन अन्ग्दानियों द्वारा उन संस्थानों के पते ,सम्पर्क नंबर आदि भी दिए गये होते -केवल घोषणा ही पर्याप्त नहीं हैं !

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  12. जाकिर जी, मेरे बारे में अच्छे विचार रखने के लिये शुक्रिया।

    Agree with Arvind Sir !!!

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  13. नेत्रदान का फ़ॉर्म तो 8 साल पहले ही भर दिया था, लेकिन नेत्रदान हो पाये या न हो पाये कहना मुश्किल है (उस समय क्या परिस्थिति बने कौन जाने)। :)

    लेकिन जो काम अभी मेरे वश में है, वह कर रहा हूं यानी रक्तदान। 14-15 बार तो हो चुका, यदि ऊपरवाले की मेहरबानी रही और डायबिटीज़ ने नहीं घेरा, तो अगले 3-4 वर्ष में 25 रक्तदान का आँकड़ा पार हो जायेगा।

    नेत्रदान-अंगदान वगैरह, सब बाद की बातें है, उसे फ़लीभूत होते देखने के लिये हम कहाँ होंगे :) :)

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  14. एक मामूली आपत्ति है…… इस नेक काम में "वीर" या "साहसी" होने वाली कोई बात नहीं है, रक्तदान में कैसी वीरता या कौन सा साहस है? यह तो मात्र एक मानव धर्म है, यदि शरीर इजाज़त दे तो प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिये।

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  15. चिपलूनकर जी, जो काम धारा के विपरीत जाकर किये जाते हैं उनके लिए साहस की जरूरत होती है। उनमें नेत्रदान और देहदान जैसे कार्य भी हैं। इसके लिए सिर्फ धार्मिक और सामाजिक परम्पराओं से ही नहीं अपने सगे सम्बंधियों से भी जूझना पड़ता है। मैं इसे इसलिए भी वीरता का कार्य मानता हूँ क्योंकि मैं भी नेत्रदान करना चाहता हूँ, पर मैं पिछले 8 सालों से अपनी धर्म भीरू पत्नि को इसके लिए तैयार नहीं कर पाया हूँ। और चूंकि बिना पारिवारिक सहयोग ये कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता, इसलिए मेरी इच्छा अभी भी अधूरी है।

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  16. ज़ाकिर भाई, आपने अंशतः सही कहा…

    मैंने ऐसे कई-कई मामले देखे हैं जहाँ व्यक्ति ने नेत्रदान का फ़ॉर्म तो भरा होता है, लेकिन उसकी मौत के बाद उसके निकट सम्बन्धी "फ़ैल" जाते हैं और उन्हें समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि यह उसकी अन्तिम इच्छा थी। एक मामले में तो मृतक की माँ को समझाने में इतना समय लग गया कि तब तक आँखों की ज्योति जाती रही (4 से 6 घण्टे के भीतर आँखे निकालना जरुरी है शायद…), जबकि एक दूसरे केस में दुर्घटना में हुई मौत की वजह से परिजन, पोस्टमॉर्टम के बाद चिथड़े हुई बॉडी के कारण उसका "चेहरा" सलामत रखना चाहते थे… बड़ी मुश्किल होती है ऐसे समय।

    भाई लोग जोश-जोश में, नेत्रदान-देहदान का फ़ॉर्म तो भर देते हैं, लेकिन कई बार परिवार को विश्वास में नही लिया जाता…। एक सज्जन तो मृत्यु शैया पर कहते-कहते मरे कि उन्हें विद्युत शवदाह गृह में जलाना, लेकिन उनके नेतागिरी वाले बेटों ने बाकायदा उनका लकड़ियों से ही दाह संस्कार ही किया… तब क्या किया जा सकता है।

    मेरे कहने का मतलब सिर्फ़ यह है कि व्यक्ति की मौत के बाद "धारा के विपरीत" तो उसकी पत्नी-माँ और बच्चों को ही चलना होता है, "साहस और वीरता" तो उन्हें दिखानी है समाज के खिलाफ़…… जाने वाला तो फ़ॉर्म भरकर चला गया। :)

    वैसे आपने रक्तदान को, वीरता (या साहस) के विशेषण से नहीं जोड़ा यह अच्छा किया… बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए रक्तदान आज के समय की माँग है, न तो इसमें कोई दर्द होता है न ही कमजोरी आती है।

    एक अच्छे विषय पर, अच्छी पोस्ट और अब तक ठीकठाक कमेण्ट्स भी… :)

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  17. इंदु पुरी गोस्वामी (Via Mail)7/24/10, 4:56 PM

    प्रिय जाकिर जी
    नमस्ते
    सलह साल पहले मैंने अपने पापा के नेत्र दान करवाए थे. मम्मी ऩे ऐसी स्थिति में भी हमारी ख़ुशी में अपनी सहमति दी. परिवार ,खानदान ऩे बहुत विरोध किया यहाँ तक की अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना कर दिया.तीनों भाई विचलित हो गये. मैंने कहा -'हमारे पापा के लिए मात्र चार कंधों की जरूरत है.जो हम चारों भाई बहिनों के हैं. बदलाव की बातें करते हैं हम और विरोध के आगे घुटने टेक देते हैं.कितनी देर रख लेंगे हम अपने पापा को. मिट्टी में तो मिलनी ही है इस देह को.पर ये क्या कम है कि हमारे पापा की आँखें फिर भी इस दुनिया में रहेगी और कोई इस दुनिया को देख सकेगा.'
    हम भाई बहिन की हिम्मत के आगे सब पस्त हो गये और चुपचाप अंत्येष्ठी में आ गये.आलोचना ???उसकी परवाह करें तो बदलाव नही ला सकते.
    मैंने देह दान की,उससे पहले अपने बच्चों और पति से वचन लिया.सब परिचितों और समाज के सम्मेलन में भी सबसे वचन लिया कि आप लोग विरोध नही करेंगे बल्कि मेरे परिवार का साथ देंगे.सबने वादा किया है.
    वैसे मैं जानती हूँ मेरे बच्चे कायर नही है.बेटे,बहु ,बेटी,और पति भी नेत्र-दान कर चुके हैं.पति कमल पूरी गोस्वामी जी भी देह दान कर चुके हैं. आगे पीछे कौन रहता है,ईश्वर जाने किन्तु मैंने कहा मेडिकल कोलेज में मैं आपका इंतज़ार करूंगी,मेरा अकेले मन नही लगेगा.जब तक नही आओगे स्टुडेंट्स को गाने सुनाती रहूंगी.
    हा हा हा

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  18. आप सभी को हमारा प्रणाम.

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  19. आप सभी को हमारा प्रणाम.

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  20. सभी महानुभावों को मेरा भी प्रणाम.

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  21. In Great personalities ko mera bhi pranam.

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  22. हमारे यहाँ कनाडा में तो जब आप किसी भी मेडिकल फसिलिटी से ख़ुद को रजिस्टर करते हैं...उसी वक्त आपको आप्शन दिया जाता है आप क्या चाहते हैं...आप अपनी इच्छा वहीँ दर्ज कर देते हैं और हस्ताक्षर भी कर देते हैं...फिर आपका नाम इस तरह के दान के डाटाबेस में चला जाता है...जिसमें मैंने अपना नेत्र दान रजिस्टर किया था.....कुछ साल पहले मुझे होस्पितालिज़ होना पड़ा था...तब मुझे एक फार्म दिया गया था जिसमें कई आप्शन थे...जिसमें देह दान की भी बात थी...मैंने वहीँ यह आप्शन ऑप्ट किया था ...हॉस्पिटल का नाम है ओट्टावा सिविक हॉस्पिटल ....तीसरी बार ...ओट्टावा हार्ट इंस्टिट्यूट ने एक बहुत बड़ा gala किया जिसमें हार्ट डोनेशन के फ़ॉर्म थे.....जहाँ मैंने वो फॉर्म भरा...हालांकि मेरे घर में इस बात से कोई खुश नहीं है...लेकिन मैंने अपने मन की कर ली है....

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  23. जहाँ तक मेरा मानना है ..अगर मैं आपको इन जगहों के फ़ोन नंबर दे भी दूँ तो क्या ..प्राइवेसी एक्ट के अंतर्गत वो आपको मेरा कोई भी information नहीं देंगे...जब मेरे पति को नहीं देते तो आपको क्या देंगे...
    मुझे भी साबित करना पड़ता है कि मैं, मैं हूँ...तब तो वो बात करते हैं...
    हाँ नहीं तो..!!

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  24. aap sabhi saahas ke puton ko naman...

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  25. baaki apnaa to jism khud apne kaam kaa nahin rahaa...

    aur kiske kaam aayegaa...?

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  26. सुरेश चिपलूनकर की बातों से पूरी सहमति -मृत्यु के बाद सगे संबंधी रार मचा सकते हैं -इसलिए एक सख्त क़ानून होना चाहिए -और लोगों को अंगदान को भी वसीयत के रूप देना चाहिए -इस सम्बन्ध में गार कोई क़ानून है तो लोगों को ज्ञात करने के अभियान होने चाहिये और नहीं है तो बनना चाहिए -एक मान्यता यह है की मृत्यु के बाद देह का विरूपण नहीं होना चाहिए और यह उचित भी है -इन बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए !

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  27. जिन्होंने पूर्व पोस्ट पर सामान्य टिप्पणी के ज़रिए अपनी बात कही वो समझ आती है उनका अपने बारे में बताना एक सामान्य सी बात थी.उनके लिए आदर भाव हैं.

    लेकिन जो इस तरह की पोस्ट के छपते ही यहाँ खुद का उल्लेख कराने 'साहसी बताने ' दौड़े दौड़े आये,वह हास्यपद लगा .

    इस पोस्ट के शीर्षक ने अपना काम कर ही दिया .

    श्री सुरेश चिपलूनकर और डॉ.अरविन्द मिश्र की बातों से पूरी सहमति .

    मृत्यु के बाद किये जाने वाले इस दान में काम में "वीर" या "साहसी" होने वाली क्या बात है, यह तो मात्र एक मानव धर्म है यदि शरीर इजाज़त दे तो प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिये।

    जीते जी जो व्यक्ति परोपकार में अपनी किडनी या शरीर का कोई अंग दान करता है तो उस का उल्लेख सार्वजानिक ज़रूर करना चाहिए.

    क्या ज़रुरी है कि हमने कोई संकल्प लिया है या मानव सेवा का कोई काम किया है तो यहाँ आ कर उस के बखान किये जाएँ?

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  28. ye blog aakhir hai kiskaa.....?




    kiskaa...???

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  29. @anonymous ji,
    jin baad main aaye logo ka aapne ullekh kiya hai.ho sakta hai unhone"yeh saahas ke putle "post padhi hi na ho.unhone bhi apni saamany tippani hi di ho.aapko kisi ka dil dukhane ka adhikar nahin hai

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  30. मिस्टर अनाम...

    चलो माना कि ये लोग साहस के पुतले नहीं हैं...लेकिन इस बात से कैसे इनकार कर सकते हो कि इनके बाद इनके शरीर से किसी न किसी का भला ही होने वाला है...यानी इस तरह आप एक सही काम में रोड़ा अटका रहे हैं...और वो भी अनाम होकर...
    ये लोग नहीं तो क्या साहसी आप हैं....?

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  31. "duniya ki sabse khoobsoorat aankhein"lekh sabko netradaan karne ke liye prairit karne ke liye likha gaya.kuch logo ne isse prairit ho kar sankalp liya to kuch ne apne anubhav yaa apne man ki baatain baanti.prantu benaam ho kar logo ki bhavnaon per teeka tipanni karna kisi ko shobha nahin deta hai .
    dono benaami shaayad ek doosre ko jaante hain .dono se prarthna hai ki kum se kum apne naam ke saath tippani karne ka sankalp to le hi lain.

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  32. ये तो ठीक है पर क्या आप मुझे बता सकते हैं की शरीर को दान करने के लिए क्या करना hota है?

    नेत्र तो मैं २ वर्ष पहले ही दान कर चुका हौं पर आज तक मुझे पता नहीं चल पाया की शरीर दान कैसे करते हैं
    तो अगर आप बता सकें तो मैं भी कर सकूँगा शरीर दान

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  33. My grand father is denoting his complete body, He is really great. I can never think about it.

    But only i know about it and he ask me to keep my mouth shut about it.

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  34. thanks sabhi logo ke liye

    ReplyDelete

Name

- दर्शन लाल बावेजा,1,- बी एस पाबला,1,-Dr. Prashant Arya,2,-अंकित,4,-अंकुर गुप्ता,7,-अभिषेक ओझा,2,-अल्पना वर्मा,22,-आशीष श्रीवास्‍तव,2,-इन्द्रनील भट्टाचार्जी,3,-काव्या शुक्ला,2,-जाकिर अली ‘रजनीश’,56,-जी.के. अवधिया,6,-जीशान हैदर जैदी,45,-डा प्रवीण चोपड़ा,4,-डा0 अरविंद मिश्र,26,-डा0 श्‍याम गुप्‍ता,5,-डॉ. गुरू दयाल प्रदीप,8,-डॉ0 दिनेश मिश्र,5,-दर्शन बवेजा,1,-दर्शन लाल बवेजा,7,-दर्शन लाल बावेजा,2,-दिनेशराय द्विवेदी,1,-पवन मिश्रा,1,-पूनम मिश्रा,7,-बालसुब्रमण्यम,2,-योगेन्द्र पाल,6,-योगेश,1,-रंजना [रंजू भाटिया],22,-रेखा श्रीवास्‍तव,1,-लवली कुमारी,3,-विनय प्रजापति,2,-वीरेंद्र शर्मा(वीरुभाई),81,-शिरीष खरे,2,-शैलेश भारतवासी,1,-संदीप,2,-सलीम ख़ान,13,-हिमांशु पाण्डेय,3,.संस्‍था के उद्देश्‍य,1,।NASA,1,(गंगा दशहरा),1,100 billion planets,1,2011 एम डी,1,22 जुलाई,1,22/7,1,3/14,1,3D FANTASY GAME SPARX,1,3D News Paper,2,5 जून,1,Acid rain,1,Adhik maas,1,Adolescent,1,Aids Bumb,1,aids killing cream,1,Albert von Szent-Györgyi de Nagyrápolt,1,Alfred Nobel,1,aliens,1,All india raduio,1,altruism,1,AM,18,Aml Versha,1,andhvishwas,5,animal behaviour,1,animals,1,Antarctic Bottom Water,1,Antarctica,9,anti aids cream,1,Antibiotic resistance,1,arunachal pradesh,1,astrological challenge,1,astrology,1,Astrology and Blind Faith,1,astrology and science,1,astrology challenge,1,astronomy,4,Aubrey Holes,1,Award,4,AWI,1,Ayush Kumar Mittal,2,bad effects of mobile,1,beat Cancer,1,Beauty in Mathematics,1,Benefit of Mother Milk,1,benifit of yoga,1,Bhaddari,1,Bhoot Pret,3,big bang theory,1,Binge Drinking,1,Bio Cremation,1,bionic eye Veerubhai,1,Blind Faith,4,Blind Faith and Learned person,1,bloggers achievements,1,Blood donation,1,bloom box energy generator,1,Bobs Award,1,Breath of mud,1,briny water,1,Bullock Power,1,Business Continuity,1,C Programming Language,1,calendar,1,Camel reproduction centre,1,Carbon Sink,1,Cause of Acne,1,Change Lifestyle,1,childhood and TV,1,chromosome,1,Cognitive Scinece,1,comets,1,Computer,2,darshan baweja,1,Deep Ocean Currents,1,Depression Treatment,1,desert process,1,Dineshrai Dwivedi,1,DISQUS,1,DNA,3,DNA Fingerprinting,1,Dr Shivedra Shukla,1,Dr. Abdul Kalam,1,Dr. K. N. 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