बाप की सजा भुगते बेटा...
Wednesday, June 12, 2013निष्क्रिय (अक्रिय) रूप से किया गया धूम्रपान भी बच्चों को आक्रामक बना सकता है
एक अभिनव अध्ययन ने सचेत किया है जिन बालकों को अपने बाल्यकाल के प्रारम्भिक दौर में धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के मुख से उगले गए सेकिंड हेंड स्मोक को झेलना पड़ा है उनके बड़े होने पर गैर सामाजिक और आक्रामक बन जाने के मौके बढ़ जाते हैं.
कैनाडा के मोंट्रियल विश्वविद्यालय (Montreal University) के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है बच्चों के आक्रामक व्यवहार का रिश्ता बचपन में उनके सेकिंड हेंड स्मोक (second hand smoke) से असर ग्रस्त होने से जुड़ता है, भले वह उस वक्त गर्भस्थ ही रहें हों या फिर उनके माँ बाप के गैर सामाजिक होने का पूर्व वृत्तांत रहा आया हो तब भी.
अन्वेषणकर्ताओं के मुताबिक़ धूम्रपानी द्वारा उगला गया धुआं उसके द्वारा सेवित कश लगाते वक्त अन्दर खींचे गए धुएं से भी ज्यादा नुक्सानदायक होता है. दुनिया भर में तकरीबन चार फीसद बच्चे इस सेकिंड हेंड स्मोक से असर ग्रस्त हो रहे हैं. यह धूम्रपानियों के बच्चों की मौजूदगी में अपने घरों के बंद कमरों में किये गए धूम्रपान का नतीजा है. बचपन के शुरूआती दौर में यह धुआं (अक्रिय धूम्रपान) और भी ज्यादा खतरनाक सिद्ध होता है. क्योंकि बच्चे का दिमाग अभी विकासमान ही होता है. रिसर्चर Linda Pagani का यही कहना है, मानना है.
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की कमी रह जाने पर गर्भस्थ का बुद्धि कोशांक भी कम रह जाता है
गर्भावस्था में महिलाओं में आयोडीन की कमीबेशी का रहजाना भारत की महिलाओं के लिए एक आम बात है. इसका इनके बच्चे के मानसिक विकास पर बड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
ब्रितानी साप्ताहिक विज्ञान पत्रिका 'लांसेट' (Lancet) में प्रकाशित एक अभिनव अध्ययन के अनुसार पता चला है आयोडीन का पर्याप्त सेवन जो दुग्ध उत्पादों तथा समुद्र से प्राप्त खाद्यों से प्राप्त होता है थाइरोइड ग्रन्थि द्वारा तैयार किये जाने वाले कुछ ऐसे हारमोनों के पर्याप्त उत्पादन के लिए ज़रूरी समझा जाता है जो भ्रूण के दिमागी विकास पे सीधा सीधा प्रभाव डालते हैं.
हाल ही में भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के 324 जिलों में एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें पता चला कि इनमें से 263 जिलों में आयोडीन की कमीबेशी व्याप्त है. नतीजा है आयोडीन की कमी से पैदा होने वाले विकार (Iodine Deficiency Disorders ,IDD). दिमाग का क्षतिग्रस्त होना (Brain damage) भी इन विकारों में शरीक है. गर्भ का असमय पर ही गर्भावस्था की पूरी अवधि भुगताये बिना गिर जाना, मानसिक मंद बुद्धिता (Mental retardation) तथा कद काठी में नाटा रह जाना (Dwarfism) ऐसे ही अन्य विकार हैं.
Surrey (सुर्रे) तथा ब्रिस्टल विश्वविद्यालय (Bristol University) के शोध करता समूहों ने ब्रिटेन की 1000 गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था की अवधि में जायजा लिया था. इनके मूत्र में गर्भावस्था की पहली तिमाही में आयोडीन के सांद्रण का मापन किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों के अनुरूप सिफारिश किये गए आयोडीन सान्द्रण के मद्दे नजर इन महिलाओं को वर्गीकृत किया गया है.
जिन महिलाओं के मूत्र में आयोडीन और सीरम क्रीटे-नाइन का अनुपात (Iodine/Creatinine Ratio) 150 से कम रहा उन्हें आयोडीन की कमी से ग्रस्त बतलाया गया जबकि 150 से ऊपर रहने पर या और भी ज्यादा पाए जाने पर उन्हें आयोडीन सक्षम (सामान्य) घोषित किया गया.
67% महिलाओं को कमीबेशी से ग्रस्त पहले वर्ग में पाया गया. इनके (सभी महिलाओं के) नौनिहालों के मानसिक विकास (IQ) का जायजा आठ साला होने पर लिया गया. बालकों के नौसाला होने पर साफ़ साफ़ और शुद्ध रूप पढ़ने की क्षमता का भी आकलन किया गया. पहले वर्ग की महिलाओं के नौनिहालों में निम्न बुद्धि कोशांक, शुद्ध पाठन तथा पढ़ते वक्त बोधन क्षमता (Reading comprehension) कमतर रह जाने की संभावना अधिक रही.
सन्दर्भ सामग्री: Passive smoking can make kids aggressive, Iodine deficiency during pregnancy lowers child's IQ, The Times of India
Keywords: Reading comprehension, Mental retardation, Brain damage, Dwarfism, Bristol University, Iodine Deficiency Disorders, Lancet Science Magazine, Montreal University, Second Hand Smoke, Iodine/Creatinine Ratio
निष्क्रिय (अक्रिय) रूप से किया गया धूम्रपान भी बच्चों को आक्रामक बना सकता है
एक अभिनव अध्ययन ने सचेत किया है जिन बालकों को अपने बाल्यकाल के प्रारम्भिक दौर में धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के मुख से उगले गए सेकिंड हेंड स्मोक को झेलना पड़ा है उनके बड़े होने पर गैर सामाजिक और आक्रामक बन जाने के मौके बढ़ जाते हैं.
कैनाडा के मोंट्रियल विश्वविद्यालय (Montreal University) के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है बच्चों के आक्रामक व्यवहार का रिश्ता बचपन में उनके सेकिंड हेंड स्मोक (second hand smoke) से असर ग्रस्त होने से जुड़ता है, भले वह उस वक्त गर्भस्थ ही रहें हों या फिर उनके माँ बाप के गैर सामाजिक होने का पूर्व वृत्तांत रहा आया हो तब भी.
अन्वेषणकर्ताओं के मुताबिक़ धूम्रपानी द्वारा उगला गया धुआं उसके द्वारा सेवित कश लगाते वक्त अन्दर खींचे गए धुएं से भी ज्यादा नुक्सानदायक होता है. दुनिया भर में तकरीबन चार फीसद बच्चे इस सेकिंड हेंड स्मोक से असर ग्रस्त हो रहे हैं. यह धूम्रपानियों के बच्चों की मौजूदगी में अपने घरों के बंद कमरों में किये गए धूम्रपान का नतीजा है. बचपन के शुरूआती दौर में यह धुआं (अक्रिय धूम्रपान) और भी ज्यादा खतरनाक सिद्ध होता है. क्योंकि बच्चे का दिमाग अभी विकासमान ही होता है. रिसर्चर Linda Pagani का यही कहना है, मानना है.
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की कमी रह जाने पर गर्भस्थ का बुद्धि कोशांक भी कम रह जाता है
गर्भावस्था में महिलाओं में आयोडीन की कमीबेशी का रहजाना भारत की महिलाओं के लिए एक आम बात है. इसका इनके बच्चे के मानसिक विकास पर बड़ा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
ब्रितानी साप्ताहिक विज्ञान पत्रिका 'लांसेट' (Lancet) में प्रकाशित एक अभिनव अध्ययन के अनुसार पता चला है आयोडीन का पर्याप्त सेवन जो दुग्ध उत्पादों तथा समुद्र से प्राप्त खाद्यों से प्राप्त होता है थाइरोइड ग्रन्थि द्वारा तैयार किये जाने वाले कुछ ऐसे हारमोनों के पर्याप्त उत्पादन के लिए ज़रूरी समझा जाता है जो भ्रूण के दिमागी विकास पे सीधा सीधा प्रभाव डालते हैं.
हाल ही में भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के 324 जिलों में एक सर्वेक्षण किया था, जिसमें पता चला कि इनमें से 263 जिलों में आयोडीन की कमीबेशी व्याप्त है. नतीजा है आयोडीन की कमी से पैदा होने वाले विकार (Iodine Deficiency Disorders ,IDD). दिमाग का क्षतिग्रस्त होना (Brain damage) भी इन विकारों में शरीक है. गर्भ का असमय पर ही गर्भावस्था की पूरी अवधि भुगताये बिना गिर जाना, मानसिक मंद बुद्धिता (Mental retardation) तथा कद काठी में नाटा रह जाना (Dwarfism) ऐसे ही अन्य विकार हैं.
Surrey (सुर्रे) तथा ब्रिस्टल विश्वविद्यालय (Bristol University) के शोध करता समूहों ने ब्रिटेन की 1000 गर्भवती महिलाओं का गर्भावस्था की अवधि में जायजा लिया था. इनके मूत्र में गर्भावस्था की पहली तिमाही में आयोडीन के सांद्रण का मापन किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों के अनुरूप सिफारिश किये गए आयोडीन सान्द्रण के मद्दे नजर इन महिलाओं को वर्गीकृत किया गया है.
जिन महिलाओं के मूत्र में आयोडीन और सीरम क्रीटे-नाइन का अनुपात (Iodine/Creatinine Ratio) 150 से कम रहा उन्हें आयोडीन की कमी से ग्रस्त बतलाया गया जबकि 150 से ऊपर रहने पर या और भी ज्यादा पाए जाने पर उन्हें आयोडीन सक्षम (सामान्य) घोषित किया गया.
67% महिलाओं को कमीबेशी से ग्रस्त पहले वर्ग में पाया गया. इनके (सभी महिलाओं के) नौनिहालों के मानसिक विकास (IQ) का जायजा आठ साला होने पर लिया गया. बालकों के नौसाला होने पर साफ़ साफ़ और शुद्ध रूप पढ़ने की क्षमता का भी आकलन किया गया. पहले वर्ग की महिलाओं के नौनिहालों में निम्न बुद्धि कोशांक, शुद्ध पाठन तथा पढ़ते वक्त बोधन क्षमता (Reading comprehension) कमतर रह जाने की संभावना अधिक रही.
सन्दर्भ सामग्री: Passive smoking can make kids aggressive, Iodine deficiency during pregnancy lowers child's IQ, The Times of India
Keywords: Reading comprehension, Mental retardation, Brain damage, Dwarfism, Bristol University, Iodine Deficiency Disorders, Lancet Science Magazine, Montreal University, Second Hand Smoke, Iodine/Creatinine Ratio

























